आपके पैसे पर गोल्फ खेलने विदेश गए राज्यपाल
विदेश यात्राओं के मुद्दे पर 'माननीयों' की आलोचना आम बात है। पहली बार विदेश यात्रा के ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें 'माननीय' नहीं 'महामहिम' सवालों के घेरे में हैं।
भारतीय राजनीति में राज्यपाल ऐसा पद है, जिसकी चर्चा शपथ ग्रहण समारोह अथवा संवैधानिक संकट आने पर होती है। ये जुमला आम भी है कि राज्यपाल रिटायर्ड हो चुके राजनीतिज्ञों का पद है।
उन दिनों के अलावा राज्यपाल सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भी दिखाई देते हैं। हाल ही में सूचना के आधिकार कानून के जरिए राज्यपालों की सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रुचि को लेकर रोचकर जानकारियां सामने आई हैं।
(नोटः लंदन में आयोजित एक कवि सम्मेलन में शामिल केशरीनाथ त्रिपाठी। तस्वीर इंडियान एक्सप्रेस से ली गई है।)
विदेश यात्रा के अनोखे कारण
गृहमंत्रालय ने बताया है कि पिछले पांच सालों में कम से कम ऐसे तीन राज्यपाल रहे हैं, जिन्होंने कवि सम्मेलनों में भाग लेने के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी।
आरटीआई कानून के जरिए प्राप्त जानकारी में बताया गया है कि एक राज्यपाल ने गोल्फ खेलने के लिए विदेश यात्रा की अनुमति मांगी थी। एक अन्य राज्यपाल अपनी पोती की ग्रेजुएशन सेरेमनी में भाग लेने के लिए विदेश जाना चाहते थे। कई राज्यपालों ने मारवाड़ी, मराठा और ऐसे ही कई सम्मेलनों में भाग लेने के लिए विदेश यात्राएं की थी।
जानकारी में बताया गया है कि पिछले पांच सालों में कई ऐसे राज्यपाल हुए हैं, जिन्होंने व्याक्तिगत कार्यों के लिए विदेश यात्राएं की।
17 राज्यपालों ने मांग NoC
2009 से लेकर अब तक 17 राज्यपाल ऐसे रहे हैं, जिन्होंने विदेश यात्राओं के लिए केंद्र सरकार से अनापत्ति प्रमाणपत्र (No-objection Certificate) मांगा था।
उन राज्यपालों में 10 ने एक बार विदेश की यात्रा की, जबकि सात राज्यपाल एक से अधिक बार विदेश गए। आंकड़ों के मुताबिक, पूर्व थल सेना अध्यक्ष जनरल (सेवानिवृत्त) जेजे सिंह, जो 2008 से 2013 तक अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे, ने सर्वाधिक विदेश यात्राएं कीं। वह अपने कार्यकाल में 9 बार विदेश गए, जिसमें 6 बार वे निजी कारणों से विदेश गए।
इनमें से पांच बार वह ब्रिटेन और फ्रांस गए, जबकि एक बार अमेरिका-कनाडा गए। राज्यापाल रहते हुए उन्होंने 73 दिन विदेश में बिताए।
गोल्फ खेलेने गए विदेश
जनरल सिंह ने 2008 में दुबई की यात्रा की थी। उन्होंने ये यात्रा दुबई डेजर्ट क्लासिक गोल्फ टूर्नामेंट में भाग लेने के की थी।
रोचक बात ये है कि गृहमंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी में ये यात्रा सरकारी बताई गई है न कि निजी। वहीं एक अंग्रेजी अखबार ने जब उस यात्रा में जनरल सिंह से पूछा तो उन्होंने बताया कि वो यात्रा सरकारी नहीं थी।
जनरल सिंह की ने सरकारी कामकाज के नाम पर सिंगापुर की दो यात्राएं की थीं। उन्होंने बताया कि जून 2009 में वे सिंगापुर में पानी पर आयोजित एक सेमिनार में भाग लेने गए थे। दूसरी यात्रा के बारे में सिंह स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके।
विदेश में मनाया शिवाजी दिवस
बिहार के वर्तमान राज्यपाल डीवाई पाटिल ने 2011 में बांग्लादेश के विदेश मंत्री के निमंत्रण पर वहां चार दिन के लिए गए थे। उन दिनों वे त्रिपुरा के राज्यपाल थे।
पाटिल ने महाराष्ट्र और शिवाजी दिवस में भाग लेने के लिए मॉरिशस की यात्रा भी की थी। पाटिल द्वारा स्थापित डीवाई पाटिल ग्रुप मॉरिशस में एक मेडिकल कॉलेज भी चलाता है।
पटना राजभवन के एक अधिकारी ने बताया कि पाटिल ने अपनी यात्रा के लिए एक भी पैसा सरकार से नहीं लिया। उन्होंने मॉरिशस की यात्रा मराठा समुदाय के निमंत्रण पर की थी और अपने कॉजेल के एक कार्यक्रम में भी शामिल हुए थे। सराकर ने उनके जत्थे में शामिल अन्य सदस्यों की यात्रा का खर्च उठाया था।
श्रंद्घाजलि देने गए विदेश
भाजपा के वरिष्ठ नेता केशरीनाथ त्रिपाठी ने गत 24 जुलाई को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में शपथ ली थी। उसके महीने भर बाद वे एक कवि सम्मेलन में भाग लेने के लिए आठ दिनों की यात्रा पर यूके गए थे।
त्रिपाठी की यात्रा का खर्च वहन करने के लिए विदेश मंत्रालय ने गृमंत्रालय को पत्र लिखा था। उड़ीसा के राज्यपाल रहे एमएसी भंडारे ने 6 निजी विदेश यात्राओं में कुल 56 दिन विदेश में गुजारे।
इनमें से चार यात्राएं सिंगापुर की, एक दक्षिण अफ्रिका और एक यूके की थी। 2009 में उन्होंने तीन बार सिंगापुर की यात्रा की थी। उन्होंने यूके की यात्रा अपनी पोती की ग्रेजुएशन सेरेमनी में शामिल होने के लिए की थी।
भंडारे से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की यात्रा महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला श्रंद्घाजलि देने के लिए की थी। सिंगापुर की यात्राएं उन्होंने अपने बेटे के साथ की थी, जो वहीं पर काम करता है।