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नरेंद्र मोदी पर काटजू और जेटली में जुबानी जंग

Sun, 17 Feb 2013 11:35 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sun, 17 Feb 2013 11:35 PM IST
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katju, jaitley in war of words over modi

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर लिखे विवादित लेख को लेकर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) के चेयरमैन मार्कंडेय काटजू और भाजपा के बीच ठन गई है। काटजू के इस्तीफे की मांग कर रही भाजपा अब इस मामले को राष्ट्रपति दरबार तक ले जाने की तैयारी में है।

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इधर, मोदी के समर्थन में मैदान में उतरे राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली और काटजू के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई है। जेटली ने काटजू पर कांग्रेसियों से भी ज्यादा कांग्रेसी होने का आरोप लगाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की है, जबकि काटजू ने जेटली पर तथ्यों को तोड़मरोड़ कर पेश करने का आरोप लगाते हुए उन्हें राजनीति छोड़ने की नसीहत भी दे डाली।
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काटजू के बयानों से नाराज भाजपा ने पलटवार करते हुए उन्हें संवैधानिक दायरे में रहने की सलाह दी है। भाजपा और काटजू के तेवरों से अब इस विवाद के और तेज होने के आसार हैं।
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काटजू ने गुजरात दंगों का हवाला देकर लेख में मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि गोधरा में क्या हुआ, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। उनके लिए यह मानना मुश्किल है कि 2002 के दंगों में मोदी का कोई हाथ नहीं था। उन्होंने मोदी की शासन प्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए थे।

इसके जवाब में जेटली ने भी एक लेख लिखकर काटजू को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की है। जेटली ने कहा कि काटजू का यह लेख व्यक्तिगत हमला ज्यादा लग रहा है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश उन लोगों का पक्ष रखने का प्रयास कर रहे हैं जिन्हें अदालत ने गोधरा ट्रेन जलाने का दोषी माना है।

उन्होंने आरोप लगाया कि काटजू यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार के मामलों पर तो खामोश रहते हैं लेकिन बिहार हो पश्चिम बंगाल हो या अब गुजरात, गैर कांग्रेसी सरकारों पर हमला करते रहे हैं। यह उनके रिटायर होने के बाद मिले पद के एवज में धन्यवाद देने की प्रवृति लगती है।

भाजपा को सबसे बड़ा एतराज यह है कि काटजू को जो जिम्मेदारी सौंपी गई है वे उसका पालन करने की बजाए राजनेता की तरह बोल रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि मोदी को सुप्रीम कोर्ट की गठित एसआईटी तीन बार क्लीन चिट दे चुकी है, इस पर भी काटजू मोदी को निशाना बना रहे हैं।

दूसरी ओर काटजू ने जेटली के आरोपों को गलत बताते हुए कहा कि वे महाराष्ट्र और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्रियों को भी कड़ा पत्र लिख चुके हैं। महाराष्ट्र में बाला साहब ठाकरे की मौत के बाद फेसबुक विवाद में दो लड़कियों की गिरफ्तारी व हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह के कैमरा तोड़ने के बयान पर ऐतराज जताया था।

उन्होंने कहा कि बिहार पर रिपोर्ट उनकी नहीं थी, वह तीन सदस्यीय समिति ने बनाई थी। काटजू इससे पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनजी पर भी निशाना साध चुके हैं। इसलिए भाजपा अब इस मामले सस्ते में छोड़ने के पक्ष में नहीं है।

मोदी ने भी साधा काटजू पर निशाना
गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रेस परिषद के अध्यक्ष मार्कंडेय काटजू पर निशाना साधा है। अपनी प्रतिक्रिया में ट्विटर पर मोदी ने लिखा कि जस्टिस काटजू ने गुजरात को भेदभावपूर्ण नजरों से देखा है। उन्होंने आगे लिखा कि जेटली ने अपने गहरी समझ वाले लेख से गुजरात के बारे में फैलाए जा रहे झूठ को नष्ट कर दिया है।

क्या है मामला
काटजू ने गुजरात दंगों का हवाला देकर एक लेख में मोदी पर निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि गोधरा में क्या हुआ, यह अभी भी रहस्य बना हुआ है। उनके लिए यह मानना मुश्किल है कि 2002 के दंगों में मोदी का कोई हाथ नहीं था।

क्या बोले जेटली
गैर कांग्रेसी सरकारों की काटजू जिस तरह से आलोचना कर रहे हैं, यह उनके लिए रिटायर होने के बाद यह पद देने के एवज में धन्यवाद देना प्रतीत होता है। न्यायमूर्ति काटजू के राजनीतिक विचारों को व्यक्त करने के अधिकार को मानता हूं लेकिन क्या अर्ध न्यायिक पद पर बैठे व्यक्ति को राजनीति में सक्रियता से हिस्सा लेने से पहले इस्तीफा नहीं देना चाहिए या उन्हें बर्खास्त नहीं किया जाना चाहिए। वह कांग्रेसियों से भी अधिक कांग्रेसी प्रतीत होते हैं।


काटजू का पलटवार
अरुण जेटली साफ तौर पर तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने के दोषी है। बिहार सरकार के खिलाफ रिपोर्ट मेरी नहीं बल्कि तीन सदस्यीय समिति की थी। जेटली से अनुरोध है कि वह राजनीति छोड़ दें और संन्यास ले लें और वे काफी खुश रहेंगे। कम से कम वह तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश नहीं करेंगे।

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