काटजू ने अब जस्टिस लाहोटी से पूछे सवाल
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भ्रष्टाचार के आरोपी जज को पदोन्नति दिए जाने के मामले में तीन पूर्व मुख्य न्यायाधीशों को सवालों के घेरे में खड़ा करने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने अब जस्टिस आरसी लाहोटी से छह सवाल पूछे हैं।
जस्टिस काटजू ने सुप्रीम के पूर्व चीफ जस्टिस लाहोटी, जस्टिस वाईके सब्बरवाल और जस्टिस केजी बालकृष्णन पर इस मामले में अनुचित समझौते करने और राजनीति के दबाव में झुकने का आरोप लगाया है।
इससे पहले जस्टिस लाहोटी ने जस्टिस काटजू के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्होंने अपने जीवन में कुछ भी गलत नहीं किया है और उन पर लगाए गए आरोप झूठे हैं। इस पर जस्टिस काटजू ने मंगलवार को छह सवाल दागते हुए जस्टिस लाहोटी से पूछा है कि वे बताएं कि क्या ये सभी तथ्य झूठे हैं।
ये हैं जस्टिस लाहोटी से जस्टिस काटजू के सवाल
1.- क्या यह सही नहीं है कि मैंने चेन्नई से जस्टिस लाहोटी को मद्रास हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के बारे में पत्र लिखा था और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने की मांग की थी। बाद में मैंने उनसे दिल्ली में मुलाकात कर भी अपने इस आग्रह को दोहराया था।
2.- क्या मेरे आग्रह पर जस्टिस लाहोटी ने उस अतिरिक्त जज के खिलाफ आईबी से गुप्त जांच नहीं कराई थी।
3.- क्या यह सच नहीं है कि मेरे चेन्नई लौटने के बाद जस्टिस लाहोटी ने मुझे फोन करके बताया था कि आईबी ने जांच में अतिरिक्त जज पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को सही पाया है।
4.-आईबी की रिपोर्ट के बाद तत्कालीन चीफ जस्टिस आरसी लाहोटी ने क्या कॉलेजियम की बैठक नहीं बुलाई थी, जिसमें जस्टिस लाहोटी के अलावा जस्टिस वाईके सब्बरवाल और जस्टिस रूमा पाल शामिल थीं। क्या यह सच नहीं है कि इस कॉलेजियम ने सरकार से भ्रष्टाचार के आरोपी अतिरिक्त जज का कार्यकाल नहीं बढ़ाने की सिफारिश की थी।
5.-कॉलेजियम के सरकार को सिफारिश भेजने के बाद क्या जस्टिस लाहोटी ने सरकार को अपनी ओर से एक नई सिफारिश नहीं भेजी थी, जिसमें अतिरिक्त जज का कार्यकाल एक साल बढ़ाने के लिए कहा गया था। ऐसा करते वक्त क्या जस्टिस लाहोटी ने कॉलेजियम के अपने दोनों सहयोगियों से राय ली थी।
6.-आईबी ने रिपोर्ट में अतिरिक्त जज के भ्रष्टाचार में लिप्त होने की बात कही थी, इसके बावजूद जस्टिस लाहोटी ने उस जज के कार्यकाल को एक साल और बढ़ाने की सिफारिश क्यों की।
खुलासे के वक्त पर दी सफाई
जस्टिस काटजू ने खुलासे के वक्त पर उठ रहे सवालों को लेकर भी स्थिति साफ करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा है कि फेसबुक पर मेरे पोस्ट पर कुछ तमिल लोग अक्सर टिप्पणी करते हैं।
इन टिप्पणियों के दौरान कुछ लोगों ने मुझसे आग्रह किया कि मैं फेसबुक पर मद्रास हाईकोर्ट से जुड़े अपने अनुभव भी साझा करूं। इन अनुभवों को साझा करने के दौरान ही मुझे अतिरिक्त जज से संबंधित यह वाकया याद आया और मैंने इसे पोस्ट कर दिया।