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कश्मीर हिंसाः मोबाइल-केबल टीवी याद रहा, इंटरनेट भूली सरकार

Sat, 09 Feb 2013 08:22 PM IST
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया
नई दिल्ली/धीरज कनोजिया Updated Sat, 09 Feb 2013 08:22 PM IST
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kashmir violence mobile tv remembered forget internet

अफजल गुरू की फांसी के बाद सरकार ने जम्मू-कश्मीर में मोबाइल फोन और केबल टीवी पर अनिश्चितकाल तक के लिए रोक लगा दी है। मगर लोगों की भावनाओं को भड़काने और अफवाह फैलाने के सबसे बड़े जरिए इंटरनेट पर नियंत्रण रखने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया है।

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अफजल की फांसी के विरोध में इंटरनेट के जरिए ट्विटर और फेसबुक पर कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। विशेषज्ञ सरकार की इस सुस्ती को असम हिंसा के बाद देश भर में पैदा हुए तनाव से जोड़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तब भी सरकार गहरी नींद से जागी थी। इसलिए उसे अब पुरानी गलती नहीं दोहरानी चाहिए।
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विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल व केबल सेवाएं ठप करने से ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा। माहौल खराब करने के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान इंटरनेट के जरिए किया जा सकता है।
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टेलीकॉम विशेषज्ञ पवन दुग्गल की मानें तो सूचना तकनीकी एक्ट की धारा 69 के तहत सरकार देश या राज्य की अखंडता, संप्रभुता बनाए रखने व नकारात्मक गतिविधियों को रोकने के लिए मोबाइल सेवाओं को ठप कर सकती है। यह अधिकार उसके पास है, लेकिन उनकी राय में जम्मू-कश्मीर जैसे अशांत क्षेत्र में सरकार का यह कदम कारगर साबित नहीं होने वाला।


गुरू की फांसी के बाद अफवाहें फैलाने के लिए मोबाइल व केबल सेवाएं ठप कर कुछ हद तक तो रोक लगाई जा सकती है, लेकिन बड़े स्तर पर सफलता के लिए इंटरनेट पर रोक लगाना जरूरी है। कूटनीतिक विशेषज्ञ जी. पार्थसारथी ने भी कहा है कि अफजल की फांसी के बाद सीमा पार से कश्मीर में भ्रामक सूचनाएं फैलाने का दौर शुरू हो जाएगा। यह सबसे ज्यादा भड़काने वाला काम करेंगी।

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