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काशी के बाद अब बेंगलुरू में बनेगा विश्वनाथ मंदिर, मंथन शुरू

Sat, 09 Jan 2016 02:42 AM IST
Updated Sat, 09 Jan 2016 02:42 AM IST
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kashi vishwanath temple built in bengaluru, review start

दक्षिण भारत में बाबा विश्वनाथ का नया दरबार आकार ले सकता है। बंगलूरू में श्रद्धालुओं को यह तोहफा दिए जाने के संकेत मिले हैं। बाबा विश्वनाथ को बंगलूरू के इंदिरा नगर में दान में मिले अनुमानित चार करोड़ रुपये की कीमत वाले भवन के नामांतरण की प्रक्रिया शुरू होने के बाद वहां मंदिर निर्माण की उम्मीद जगी है।

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राजस्व अभिलेखों में बाबा विश्वनाथ का नाम दर्ज कराने के साथ ही नए मंदिर की योजना पर बंगलूरू प्रशासन के साथ वहां के स्थानीय निवासियों से भी विमर्श किया जाएगा। अपने भवन को बाबा विश्वनाथ के नाम दान करने वाले बंगलूरू निवासी सच्चिदानंद ज्ञावली के निधन के बाद मंदिर प्रशासन ने नामांतरण प्रक्रिया शुरू करा दी है।
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भवन पर बाबा विश्वनाथ का नाम दर्ज कराने के लिए अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी पारस नाथ द्विवेदी पिछले दो दिनों से बंगलूरू में हैं। वहां उन्होंने स्थानीय निवासियों के साथ बाबा के नए दरबार की रूपरेखा पर चर्चा शुरू कर दी है। छह साल पहले दानदाता सच्चिदानंद ने बाबा के नाम अपनी ओर से एक वसीयत लिखी थी।

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मंदिर प्रशासन को सुझाव भी मिले

kashi vishwanath temple built in bengaluru, review start

इस वसीयत में उन्होंने इच्छा जताई है कि उनके न रहने के बाद भवन का इस्तेमाल बाबा काशी विश्वनाथ के धार्मिक कार्यों में ही किया जाए। दान में मिले इस भवन को दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं के लिए विश्वनाथ मंदिर में रूप में तब्दील करने के लिए मंदिर प्रशासन को सुझाव भी मिले हैं।

बंगलूरू स्थित भवन को मंदिर का आकार देने की दिशा में मंथन भक्तों के सुझावों का ही एक हिस्सा माना जा रहा है। कोशिश होगी कि उस मंदिर में बाबा विश्वनाथ के ज्योतिर्लिंग से स्पर्श कराकर शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा कराई जाए। उस मंदिर में ठीक उसी तरह आरती, अनुष्ठान होंगे, जैसे काशी विश्वनाथ में होते हैं।

रात 2:45 बजे से मंगला आरती, दोपहर में भोग आरती, शाम को सप्तर्षि आरती, शृंगार आरती और रात 11:15 बजे शयन आरती के बाद वहां भी बाबा के कपाट बंद होंगे।  ताकि वहां आने वाले दक्षिण भारतीय श्रद्धालुओं को बाबा काशी विश्वनाथ की अनुभूति मिल सके।

काशी विश्वनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक

kashi vishwanath temple built in bengaluru, review start

पीएन द्विवेदी, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने कहा कि बंगलूरू में मिले भवन को विश्वनाथ मंदिर का रूप देने के सुझाव आए हैं। इस पर विचार किया जा रहा है। बंगलूरू के स्थानीय नागरिकों से भी इस पर राय ली जाएगी। कोशिश होगी कि वहां के मंदिर में भी वह सभी सुविधाएं और अनुष्ठान की परिपाटी विकसित हो, जो काशी में है।

बाबा काशी विश्वनाथ द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक हैं। काशी में स्थित इनके मंदिर का हिंदू समाज में विशिष्ट स्थान है। उत्तर वाहिनी गंगा में स्नान के बाद इस मंदिर में बाबा का दर्शन करने से मोक्ष प्राप्ति की मान्यता रही है।

बाबा विश्वनाथ के मौजूदा मंदिर का निर्माण 1780 में इंदौर की महारानी अहिल्या बाई होल्कर ने कराया था। इसके बाद 1853 में पंजाब के तत्कालीन राजा रंजीत सिंह ने साढ़े 22 मन सोना दान किया। इसी सोने के पत्तरों से विश्वनाथ मंदिर के शिखरों को मंडित किया गया है।

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