{"_id":"cb73cf16-58d5-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"kasab-mercy-petition-was-four-line","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार लाइन की थी कसाब की दया याचिका","category":{"title":"India News Archives","title_hn":"इंडिया न्यूज़ आर्काइव","slug":"india-news-archives"}}
चार लाइन की थी कसाब की दया याचिका
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Mon, 07 Jan 2013 07:53 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुंबई में आतंकी हमले में शामिल पाक दहशतगर्द अजमल कसाब ने राष्ट्रपति को जो दया याचिका भेजी थी वह चार लाइन की थी। याचिका उर्दू में लिखी गई थी। कसाब की इस दया याचिका को राष्ट्रपति ने खारिज कर दिया था और उसे 21 नवंबर, 2012 को फांसी दे दी गई थी।
विज्ञापन
कसाब को फांसी दिए जाने के करीब डेढ़ महीने बाद हाथ से लिखे इस याचिका को सार्वजनिक किया गया है। उर्दू भाषा में लिखी गई इस याचिका में कई गलतियां हैं। इस दया याचिका की प्रति लखनऊ निवासी उर्वशी शर्मा को सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत उपलब्ध कराई गई है।
विज्ञापन
अपनी इस छोटी से याचिका में कसाब ने लिखा था, ‘सर, मुझे फांसी की सजा सुप्रीम कोर्ट हो गई है। फांसी की सजा से मुझे छोड़ दिया जाए। मेरे ऊपर दया करो और मुझे फांसी से रिहा कर दे। आपका अजमल कसाब।’ जेल अधिकारियों ने गलतियों को सुधारते हुए इसका अनुवाद किया था। राष्ट्रपति ने इस याचिका को 5 नवंबर, 2012 को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद कसाब को 21 नवंबर 2012 को पुणे के यरवदा जेल में फांसी दे दी गई थी।
विज्ञापन