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डीएमके समर्थन न देने पर कायम: करुणानिधि

Fri, 29 Mar 2013 08:54 PM IST
चेन्नई/एजेंसी
चेन्नई/एजेंसी Updated Fri, 29 Mar 2013 08:54 PM IST
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karunanidhi denies going soft on upa

यूपीए सरकार को फिर से समर्थन देने संबंधी खबरों को खारिज करते हुए डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने साफ कर दिया है कि वह समर्थन नहीं देने के अपने रुख पर कायम है।

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उन्होंने सरकार को बाहर से भी समर्थन देने की संभावना से भी इंकार कर दिया। श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दे के चलते डीएमके ने 19 मार्च को यूपीए सरकार से समर्थन वापस ले लिया था।
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करुणानिधि ने कहा कि वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि बाहर से कोई समर्थन नहीं दिया जाएगा। अगर ‘सांप्रदायिक ताकतें’ सत्ता में आ गईं तो उनकी पार्टी इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगी।
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उन्होंने कहा, ‘हमारा मत है कि कोई भी सरकार हो, लेकिन उसे श्रीलंका सरकार की ओर से किये गये युद्ध अपराधों की भरोसेमंद एवं स्वतंत्र जांच के साथ ही टेसो सम्मेलन एवं पार्टी कार्यकारिणी में मंजूर किये गये अन्य प्रस्तावों से जुड़ी हमारी मांग माननी होगी। हम गठबंधन से इसलिए अलग हुए क्योंकि यूपीए ने इन मांगों को मानने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।’

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने डीएमके महासचिव के. अनबाजगन के कथित बयान पर करुणानिधि की चुप्पी को लेकर सवाल उठाया था। खबरों के अनुसार अनबाजगन ने कहा कि पार्टी की ओर से यूपीए से समर्थन वापस लेने के बावजूद पार्टी सरकार नहीं गिराएगी और टीआर बालू रेलवे की एक समिति के अध्यक्ष बने रहेंगे।

श्रीलंकाई तमिलों पर जनमत संग्रह कराने के तमिलनाडु विधानसभा में एक प्रस्ताव लाए जाने के मुद्दे पर करुणानिधि ने कहा कि यह पिछले साल के टेसो सम्मेलन में पारित प्रस्तावों के ही समान है।


राष्ट्रमंडल राष्ट्राध्यक्षों की बैठक (चोगम) कोलंबो की जगह किसी अन्य स्थान पर कराने के केंद्रीय जहाजरानी मंत्री जीके वासन के व्यक्तिगत विचार पर करुणानिधि ने कहा कि यह ‘प्रशंसनीय बयान’ है। लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि वासन की पार्टी कांग्रेस का भी यही रुख होना चाहिए।

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