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'श्रीलंकाई तमिलों का 'विनाश' चाहते हैं राजपक्षे'
पटना/चेन्नई/दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी
Updated Fri, 08 Feb 2013 07:04 PM IST
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देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन के बीच श्रीलंकाई राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे शुक्रवार को अपनी दो दिवसीय यात्रा के तहत बिहार के बोधगया पहुंच गए। अपनी पत्नी सिरांथी राजपक्षे समेत 70 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ श्रीलंकाई राष्ट्रपति का गया इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्वागत राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके सहयोगियों ने किया।
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हालांकि तमिलनाडु में करुणानिधि की पार्टी डीएमके और बिहार में लेफ्ट पार्टियों ने राजपक्षे की भारत यात्रा के खिलाफ कई जगह विरोध प्रदर्शन किए। तमिलनाडु के सीएम करुणानिधि के नेतृत्व में तमिलनाडु में कई जगहों पर प्रदर्शन किए गए।
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करुणानिधि ने राजपक्षे पर श्रीलंका में तमिलों और तमिल भाषा के ‘विनाश’ की कोशिश करने का आरोप लगाया है। कुछ समय पहले करुणानिधि द्वारा पुनर्जीवित किए गए ‘तमिल ईलम समर्थक संगठन’ के कार्यकर्ताओं ने काली कमीज पहनकर तिरुपति और बोधगया की यात्रा पर आए राजपक्षे के खिलाफ नारे लगाए।
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इस दौरान पार्टी के कोषाध्यक्ष एमके स्टालिन और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। राज्य के कुछ भागों में श्रीलंका के राष्ट्रपति के पुतले जलाए गए और वकीलों ने अदालतों के कामकाज का बहिष्कार किया। दिल्ली में यात्रा के विरोध में प्रधानमंत्री निवास तक मार्च करने की कोशिश में एमडीएमके प्रमुख वाइको और उनके समर्थकों को हिरासत में ले लिया गया। वह सुबह से ही जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे।
गया एयरपोर्ट पर ही राजपक्षे को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। इसके बाद उनका काफिला महाबोधी मंदिर की ओर पूजा अर्चना के लिए रवाना हो गया। मंदिर में प्रवेश के दौरान ही बाहर खड़ी भीड़ में शामिल आइसा और रिवोल्यूशनरी यूथ फेडरेशन के कार्यकर्ताओं ने विरोध करते हुए ‘तमिल के हत्यारे वापस जाओ’ के नारे लगाए।
इसके बाद राजपक्षे एक होटल पहुंचे तो यहां भी उनके खिलाफ नारेबाजी की गई। दोनों ही जगहों से पुलिस न प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है।