करनाल में दलित महिला की हत्या की जांच सीबीआई के हवाले
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सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले को दरकिनार करते हुए हरियाणा के करनाल में एक दलित महिला की हत्या के मामले की जांच सीबीआई के हवाले करने का आदेश दिया है। इस महिला की नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म भी किया गया था। हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की याचिका खारिज कर दी थी।
न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और प्रफुल्ल सी. पंत की पीठ ने वर्ष 2012 की इस घटना की सीबीआई जांच करने का आदेश देते हुए कहा है कि ट्रायल शुरू होने का यह मतलब कतई नहीं है कि मामले की नए सिरे से जांच का काम दूसरी एजेंसी को नहीं सौंपा जा सकता।
पीठ ने कहा कि फिर से जांच के आदेश देने या नए सिरे से जांच कराने का आदेश देने का अधिकार संविधानिक अदालत के पास निहित है। ट्रायल का शुरू हो जाना और कुछ गवाहों के बयान दर्ज होने का यह मतलब नहीं है कि संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। ये अधिकार इसलिए ही होते हैं कि मामले की जांच निष्पक्ष और सही तरीके से हो।
हरियाणा सरकार भी सहमत
पीड़ित दलित महिला के पति ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। इस शख्स ने हाईकोर्ट से मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की गुहार की थी लेकिन उसकी याचिका को खारिज कर दिया गया था। हालांकि हरियाणा सरकार भी मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की पक्षधर थी।
हाईकोर्ट का तर्क था कि चूंकि इस मामले का ट्रायल शुरू हो चुका है और कुछ गवाहों के बयान भी दर्ज हो गए हैं इसलिए जांच सीबीआई को नहीं सौंपी जा सकती।
लेकिन शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के इस फैसले को दरकिनार कर दिया। शीर्ष अदालत ने पाया कि इस मामले की जांच में शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से कार्रवाई भी की गई है। इन पुलिस अधिकारियों का ट्रांसफर किया गया और उन्हें डिमोट भी किया गया।
याचिकाकर्ता की पत्नी की हत्या दो सितंबर, 2012 को कर दी गई थी। आरोप है कि हत्या में शामिल कुछ आरोपी उसकी नाबालिग बेटी के साथ किए गए बलात्कार में भी शामिल थे। आरोपियों ने पीड़ित परिवार को धमकी भी दी थी, जिस कारण परिवार को पुलिस संरक्षण दिया गया है।