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तीसरे मोर्चे के लिए सियासी कसरत तेज

Sat, 15 Jun 2013 08:59 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Sat, 15 Jun 2013 08:59 PM IST
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karat, naidu speak to sharad yadav for third front

भाजपा-जदयू में अलगाव की महज घोषणा बाकी रहने के बाद गैर एनडीए-गैर यूपीए तीसरे विकल्प के लिए सियासी कसरत तेज हो गई है।

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शनिवार को नई संभावनाओं पर माकपा महासचिव प्रकाश करात और टीडीपी अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने जद-यू प्रमुख शरद यादव से बातचीत की।

सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने इन्हीं संभावनाओं को टटोलने के लिए शुक्रवार को भाकपा के वरिष्ठ नेता एबी बर्धन से मुलाकात की थी।

उधर, एक जुलाई को होने वाली वाम दलों की बैठक में भी इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा होगी। हालांकि वाम दलों का मानना है कि वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में तीसरा विकल्प लोकसभा चुनाव के बाद ही खड़ा हो पाएगा।

दरअसल गैर एनडीए-गैर यूपीए विकल्प पर सियासी कसरत बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और ममता बनर्जी के बीच चर्चा के बाद फेडरल फ्रंट के दांव से शुरू हुई है।
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एनडीए से हटने का संकेत देते हुए नीतीश ने चार राज्यों झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा और बिहार के एक मंच पर आने की जरूरत बताई है।

इसका पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने स्वागत किया है। नीतीश के इस दांव के साथ ही केंद्र में तीसरा राजनीतिक विकल्प खड़ा करने की सियासत तेज हो गई।
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हालांकि करात के साथ-साथ बर्धन का भी मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में चुनाव से पहले तीसरा विकल्प खड़ा होना मुश्किल है।

करात ने कहा कि वाम दल नए सिरे से अपनी नीतियों और कार्यक्रमों के संदर्भ में अन्य दलों से बातचीत कर इसकी संभावना तलाशेंगे।

उधर, बर्धन ने कहा कि फेडरल फ्रंट जैसी अवधारणा मतदाताओं को आकर्षित नहीं कर पाएगी।

गैर यूपीए-गैर एनडीए विकल्प के संबंध में शरद ने कहा कि फिलहाल जद-यू राजग में है, इसलिए ऐसी संभावनाओं पर वह पार्टी के अंतिम फैसले के बाद ही टिप्पणी करेंगे।

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