राजस्थान: कल्याण सिंह सुधारेंगे विश्वविद्यालयों के बिगड़े ढर्रे
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राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह ने यहां के विश्वविद्यालयों के बिगड़े ढर्रे को सुधारने की ठान ली है। उन्होंने कोरी बातें न करते हुए सभी विश्वविद्यालयों को विभिन्न समस्याओं के समाधान सुझाएं हैं और चेताया भी है कि अगर उन्होंने इन सुझावों को अपनाते हुए सुधार नहीं किए, तो वे उनके किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।
उन्होंने जयपुर स्थित राजस्थान विश्वविद्यालय में पिछले 20 वर्षों से अटके डिग्री वितरण के काम को तीन माह में पूरा करने के निर्देश भी दिए हैं। उन्होंने हर विश्वविद्यालय को एक या दो गांवों को गोद लेकर आदर्श गांव के रूप में स्थापित करने को भी कहा है और कार्ययोजना 15 दिन में भेजने के निर्देश भी दिए हैं।
कल्याण सिंह ने सभी विश्वविद्यालयों की प्रवेश से लेकर पदक तक की कठिनाइयों को सुलझाने के लिए पी-8 फार्मूला दिया है। इस फॉर्मूले में प्रवेश, पढ़ाई, परिसर, परीक्षा, परीक्षण, परिणाम, पुनर्मूल्यांकन और पदक जैसी समस्त गतिविधियों को शामिल किया गया है।
कल्याण सिंह विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में समरूपता लाने, छात्र व अध्यापक की उपस्थिति को सुनिश्चित करने, छेडख़ानी, गुटबाजी, रेंगिंग और अन्य असामाजिक गतिविधियों से मुक्त करने, विद्यार्थियों के लिए पुस्तकालय, खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहित देने, नकल विहीन परीक्षाओं का संचालन करने के प्रयास में जुटे हैं।
विश्वविद्यालयों को दिया पी-8 फॉर्मूला
कल्याण सिंह विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह को नियमित कराने के प्रति गम्भीर हैं। वे चाहते है कि विद्यार्थियों को उनकी उपाधियां विलम्ब रहित एवं गरिमापूर्ण रीति-नीति से मिल जाएं।
पी-1 (प्रवेश) - प्रवेश की समयबद्धता, प्रवेश प्रक्रिया में शुचिता। पूरे वर्ष का शैक्षणिक कलेंडर तैयार हो, जो सभी छात्रों को वितरित हो।
पी -2 (पढ़ाई) - सभी विश्वविद्यालयों में विभिन्न संकायो के पाठ्यक्रमों में समरूपता। पाठ्यक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता दिलाने में सहायक हो। कक्षाएं नियमित। छात्रों व अध्यापकों की नियमित उपस्थिति। निर्धारित उपस्थिति से कमवाले छात्रों को परीक्षाओं में बैठने की अनुमति नहीं। छात्रों की उपस्थिति की/अनुपस्थिति की नियमित सूचना अभिभावकों को भेजने की व्यवस्था। ट्यूशन करने वाले प्राध्यापकों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई।
पी-3 (परिसर/परिवेश) - असामाजिक गतिविधियों पर कठोर नियंत्रण। छात्राओं के साथ छेड़खानी, छात्रों की बीच गुटबाजी, रैगिंग एवं गुंडागर्दी नहीं। आपराधिक प्रवृति के छात्रों का चिह्निकरण व सख्त कार्रवाई। छात्रावासों में अनाधिकृत रूप से रह रहे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई। इंटरनेट व वाई-फाई सुविधा। लाइब्रेरी, खेलकूद एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रोत्साहन।
पी - 4 (परीक्षा) - परीक्षा की शुचिता से समझौता नहीं। नकल विहीन परीक्षा प्राथमिकता। सामूहिक नकल कराना एक गिरोहबन्द जैसा अपराध है। पेपर लीक जैसे कार्यो को अंजाम देने वालों के विरूद्ध आपराधिक कार्रवाई।
पी - 5 (परीक्षण) - उत्तर पुस्तिकाओं का परीक्षण एवं मूल्याकंन में अयोग्य/लापरवाह परीक्षकों को दूर रखा जाए। केन्द्रीयकृत मूल्याकंन पर भी विचार।
पी - 6 (परिणाम) - परीक्षाओं के परिणाम की गोपनीयता रखते हुए घोषणा समय पर व त्रुटिविहीन हो। त्रुटि होने से विद्यार्थी आत्मघाती कदम उठा सकता है।
पी - 7 (पुनर्मूल्याकंन) - पुर्नमूल्यांकन का कार्य गंभीरता व साफगोही से। अगर प्रथम मूल्याकंन और पुनर्मूल्याकंन के परिणामों में 20 प्रतिशत से अधिक का अन्तर, तो तीसरे परीक्षक का उपयोग। पुर्नमूल्यांकन में गड़बड़ करने वाले को ब्लैकलिस्टेड।
पी -8 (पदक व पदवी) - उपाधि (डिग्री) समय से। वर्षान्त में पूर्व निर्धारित तिथि पर वितरण। नियमित दीक्षान्त समारोह। मेधावी छात्रों के पदक ससमय प्रदान करने की विलम्ब रहित एवं गरिमपूर्ण रीति-नीति तय की जाए।