EXCLUSIVE: आदर्श गांव पर आफत, मोदी के सांसद बेखबर
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी आदर्श गांव योजना में चयनित सहारनपुर में गंगोह के सुखेड़ी गांव में विपदाओं का पहाड़ टूट गया है। डेढ़ माह में कैंसर और दूसरी बीमारियों की वजह से नौ मौतें हो गईं। इस वक्त भी गांव में बीमारों की लंबी फौज दिखाई दे रही है। गांव पर आई इस आफत से सांसद तक बेखबर हैं। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन को इसकी पूरी खबर है मगर, संजीदगी नहीं है।
कैराना सांसद हुकुम सिंह ने करीब सवा दो महीने पहले गंगोह के सुखेड़ी गांव को आदर्श गांव के रूप में विकसित करने को गोद लिया था। इस घोषणा के बाद भी सांसद गांव में नहीं गए थे और अधिकारियों को ही वहां भेजकर औपचारिकता पूरी कर ली थी। उधर, बीते डेढ़ महीने में सांसद के गोद लिए गांव पर विपदा टूट पड़ी है। इस दौरान बीमारियों की वजह से नौ मौतें हो गई हैं और दर्जनों ग्रामीण गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं।
आलम यह है कि डेढ़ माह के भीतर एक ही परिवार के तीन सदस्यों पिता-पुत्र व पौत्र के अलावा दो सगे भाइयों सहित नौ लोग अकाल मौत के शिकार हो गए। इसके अलावा एक दर्जन से ज्यादा लोग कैंसर सहित विभिन्न बीमारियों की चपेट में हैं।
गांव में है बीमारों की फौज
ग्राम प्रधान बलवीर सिंह सैनी के अनुसार मृतकों में दो सगे भाई पवन व जनेशर पुत्रगण रामचंद्र, और मनफूल, उसका पुत्र श्यामो व पौत्र सचिन के अलावा इंद्र पुत्र मुख्तयारा, मिहिर पुत्र रिसाला, अमित पुत्र राकेश व रतन की बीमारी के दौरान 24 से 72 घंटे के भीतर ही उनकी मौत हो गई।
इन मौतों के अलावा गांव में बीमारों की लंबी फौज से भी लोगों में दहशत है। गांव निवासी कर्म सिंह, अरविंद, ऋषिपाल, सोरण, सत्तो कैंसर से पीड़ित बताए जाते हैं। वहीं कमलेश, तारा और राधा का गला सूजा हुआ है। नरेश का पेट फूला हुआ है। इसके अलावा कई और लोग भी अज्ञात बीमारी से पीड़ित हैं। अचानक पनपी बीमारियों को लेकर गांव के लोगों में भय का साम्राज्य व्याप्त है। ग्राम प्रधान सहित मांगेराम, रामधन, बीरम, बाबूराम, ओमवीर आदि का कहना है कि गांव में आने वाले अधिकारियों व स्वास्थ्य विभाग की टीम को गांव में होने वाली मौतों और बीमारियों से अवगत कराया था। उन्होंने उनकी बातों को अनसुना कर दिया। केवल इतना मात्र कहा कि बीमारियों की रोकथाम धीरे-धीरे ही होगी।
एक बार भी गांव नहीं आए सांसद
घोषणा किए जाने के बाद सांसद हुकुम सिंह ने एक बार भी गांव आना गवारा नहीं समझा है। ग्रामप्रधान सहित जिम्मेदार लोगों ने जब सांसद से संपर्क साधा तो उन्होंने शीघ्र आने की बात कही। उधर, आदर्श गांव की घोषणा हुए सवा दो माह बीत गए हैं। मगर अभी तक गांव में विकास की कोई किरण दिखाई नहीं दी है। केवल दो या तीन बार अधिकारी आए और सर्वे के नाम पर औपचारिकता पूरी कर चले गए।
जांच कराकर इलाज मुहैया होगा
जिलाधिकारी डा. इंद्रवीर सिंह यादव ने बताया कि हम गांव में गए थे तो भी बीमारियों की बात सामने आई थी। उस वक्त स्वास्थ्य विभाग की टीम को जांच के निर्देश दिए गए थे। गांव में फैली बीमारी की पहचान नहीं हो पाई थी। मगर, ग्रामीणों को बेहतर इलाज देने को कहा गया था। नौ मौतों की बात की जानकारी नहीं है। पूरे मामले की जांच कराकर जांच कराई जाएगी।