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जानिए, कौन हैं नोबेल पाने वाले कैलाश सत्यार्थी

Fri, 10 Oct 2014 07:45 PM IST
Updated Fri, 10 Oct 2014 07:45 PM IST
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Nobel Peace Prize 2014 Winner Kailash Satyarthi - Biography

बाल मजदूरों के खिलाफ काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तानी सामाजिक कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई को संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया। शांति का ये नोबेल का पुरस्कार दक्षिण एशिया में ऐसे वक्त आया है, तब दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच जम्मू-कश्मीर में कई दिनों से गोलीबारी हो रही हैं, जिसमें कई नागरिकों की जान जा चुकी है।

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मलाला यूसुफजई को पिछले वर्ष भी नोबल शांति पुरस्कारों दिए जाने की चर्चा थी। वह मात्रा 17 वर्ष की हैं और नोबेल सम्मान पाने वाली सबसे कम उम्र की शख्सियत हैं।
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बाल श्रम के खिलाफ ढाई दशक से काम कर रहे कैलाश सत्यार्थी भारत में कम परिचित नाम हैं। वह नोबेल पाने वाले वह नौवें भारतीय हैं।

बचपन बचाओ आंदोलन चलाते हैं कैलाश

Nobel Peace Prize 2014 Winner Kailash Satyarthi - Biography

बाल श्रम के खिलाफ ढाई दशक से सक्रिय कैलाश सत्यार्थी मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में 11 जनवरी 1954 को पैदा हुए थे। वह अपनी पत्नी, बेटे, बहू और बेटी के साथ दिल्ली में रहते हैं। वह 'बचपन बचाओ आंदोलन' भी चलाते हैं।

कैलाश ने करियर की शुरुआत इलेक्ट्रानिक इंजीनियर के रूप में की थी। हालांकि 26 वर्ष की उम्र में नौकरी छोड़कर उन्होंने बच्चों के अधिकारों के लिए काम करना शुरु कर दिया। कैलाश इस इस समय 'ग्लोबल मार्च अगेंस्ट चाइल्ड लेबर' के अध्यक्ष भी हैं।

सत्यार्थी इंटरनेशनल सेंटर ऑन चाइल्ड, लेबर एंड एजुकेशन से भी जुड़े हैं। ये संगठन कई समाजिक संगठनों, अध्यापकों और ट्रेड यूनियनों को एक समूह है, जो शिक्षा के प्रसार के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलता है।

सत्यार्थी ने बालश्रम के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कैंपेन चलाया

Nobel Peace Prize 2014 Winner Kailash Satyarthi - Biography

कैलाश ने 'रगमार्क की स्‍थापना भी की है, जिसे 'गुडवीव' के नाम से भी जाना जाता है। रगमार्क ने यूरोप और अमेरिका में 1980 और 1990 के दशक में एक जागरुकता अभियान चलाया था, जिसका लक्ष्य उन उत्पादों के उपभोग को हतोत्साहित करना था, जिसे निर्मित करने में बाल श्रम का इस्तेमाल किया जाता है।

सत्यार्थी ने बालश्रम के खिलाफ वैश्विक स्तर पर भी कैंपेन चलाया। उन्होंने बाल श्रम के खिलाफ होने वाले आंदोलनों को 'सभी को शिक्षा' के अधिकार से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई।

सत्यार्थी यूनेस्को की उस स‌मिति का भी हिस्सा रहे हैं, जिसे 'सभी को शिक्षा' के अधिकार की देखरेख के लिए बनाया गया। वह ग्लोबल पार्टनर फॉर एजुकेशन के सदस्य भी हैं। कैलाश सत्यार्थी का कई अंतरराष्टीय कानूनों और संधियों के निर्माण में भी योगदान है। उन पर कई डॉक्यूमेंट्री, टीवी शो और टॉक शो बन चुके हैं। नोबेल से पहले भी उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।

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