शांति के दूत कैलाश-मलाला नोबेल से सम्मानित
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नार्वे की राजधानी ओस्लो में भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला युसूफजई को शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही नोबेल का मंच दो विरोधी देशों के बीच एकता और आपसी सहयोग का गवाह भी बन गया।
दोनों देशों के शांतिदूतों ने भी पुरस्कार प्राप्त करने के बाद दुनियाभर में शांति का संदेश दिया। नोबेल कमेटी ने भी इस मौके पर विश्व को एकता और शांति का संदेश देने का प्रयास किया जब कार्यक्रम के दौरान विशेष तौर पर आमंत्रित किए गए पाकिस्तानी सूफी गायक राहत फतेह अली खान और प्रख्यात भारतीय सरोदवादक उस्ताद अमजद अली खान ने अपने तरानों से लोगों को भावविभोर कर दिया।
इसके साथ ही सांस थामकर इस लम्हे का इंतजार कर रहे दोनों देशों के लोगों में जश्न की शुरूआत हो गई। पुरस्कार लेने के बाद सत्यार्थी ने अपने संबोधन की शुरूआत ''स्वर्ग से भी महान अपनी भारत भूमि को स्मरण करता हूं'' कहकर की।
विश्व शांति के संदेश का मंच बना नोबेल समारोह
इसके बाद उन्होंने ओस्लो के मंच से दुनियाभर को शांति का संदेश देते हुए उपेक्षित और शिक्षा से वंचित बच्चों के अधिकारों के लिए आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम साथ साथ चिंतन करें और साथ मिलकर चलें। कहा हर बच्चे को हर तरह की आजादी मिले, हमारे लिए हर बचपन मायने रखता है।
सत्यार्थी ने इस दौरान वहां मौजूद अतिथियों से बच्चों की आजादी के लिए प्रयास करने का संकल्प भी लिया। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानी बालक इकबाल रशीद की शहादत का भी जिक्र किया।
सत्यार्थी के हर संबोधन पर खचाखच भरे हॉल में जमकर तालियां बजी। इसके बाद उन्होंने संस्कृत के श्लोक असतो मा सदगमय... का उच्चारण कर अपने भाषण का अंत किया। इसके बाद हॉल में मौजूद लोगों ने खड़ृ होकर उनका अभिवादन किया। कार्यक्रम के दौरान पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और दोनों देशों के राजनीतिक और चर्चित हस्तियां मौजूद रहीं।
मलाला ने सत्यार्थी को बताया चैंपियन
ये सम्मान मेरा नहीं उन बच्चों का है जो सम्मान और शिक्षा चाहते हैं। मैं चाहती हूं कि दुनिया का हर बच्चा पढ़ें, हर तरफ शांति हो। मलाला ने इतनी कम उम्र में उन्हें यह सम्मान देने के लिए नोबेल कमेटी का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि यह सम्मान की बात है। कहा, मैं अपने पिता का शुक्रिया अदा करना चाहूंगी जिन्होंने मेरे पर कतरे नहीं मुझे उड़ने दिया। मेरी मां जिन्होंने सच बोलना सिखाया, मेरे दादा मुझे दुनिया की सबसे खुशी बच्ची कहते थे।
उन्होंने भारत के सत्यार्थी को चैंपियन कहकर बुलाया। कहा हम मिलकर बच्चों के अधिकार के लिए काम कर सकते हैं। हम दुनिया को दिखाएं कि भारत पाकिस्तान मिलकर काफी कुछ अच्छा कर सकते हैं। मलाला ने अपने बचपन और स्वात घाटी का जिक्र करते हुए तालिबान द्वारा गोली मारने की घटना का भी जिक्र किया।
कहा लोग मुझे अलग अलग नामों से बुलाते हैं, कुछ लोग कहते हैं यह वही लड़की है जिसे तालिबान ने गोली मारी थी, कुछ लोग कहते थे कि यह वही लड़की है जो अधिकारों के लिए लड़ती है। वहीं कुछ अब कहते हैं कि यह वही लड़की है जिसे नोबेल पुरस्कार मिला है। मैं हर बच्चे को खुश देखना चाहती हूं।
उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि मैं पहली नोबेल विजेता हूं जो अपने भाइयों से लड़ती हूं। आत्मविश्वास से भरपूर दिख रही मलाला ने कहा कि मैं अकेली नहीं हूं, न ही मेरी आवाज अकेली है, मैं दुनिया की उन करोडों लड़कियों की आवाज हूं जो अधिकारों से वंचित हैं।