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'न्याय लाखों गरीबों के लिए एक भ्रमजाल'
अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 10 Nov 2013 04:17 AM IST
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भारत के मुख्य न्यायाधीश पी. सदाशिवम् ने शनिवार को कहा कि आम आदमी के लिए मौजूदा समय भी न्याय एक अबूझ पहेली है। जबकि आसानी से उन्हें न्याय मिले, इसके प्रयास किए गए हैं। लेकिन जटिल कानूनी प्रक्रिया की वजह से अभी भी वादी के हित कई बार अनदेखे रह जाते हैं।
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चीफ जस्टिस ने यह विचार सर्वोच्च अदालत के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस जीएस सिंघवी के उस कथन के समर्थन में कहे, जिसमें उन्होंने कहा कि न्याय आज भी लाखों गरीब लोगों के लिए एक भ्रमजाल है।
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दोनों ही न्यायाधीशों ने यह विचार राष्ट्रीय विधि सेवा दिवस के एक कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए। जस्टिस सदाशिवम् ने कहा कि ज्यादातर लोग अब भी यह मानते हैं कि वादी के हितों को कानूनी प्रक्रिया में अनदेखा किया जाता है।
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ऐसे में जरूरत है ऐसी मानसिकता को बदलने के लिए कदम उठाए जाने की और जागरूकता फैलाने की। उन्होंने कहा कि आम आदमी की आज भी यही सोच है कि न्याय उसके लिए अबूझ पहेली है।
वहीं जस्टिस सिंघवी ने कहा कि मौजूदा समय यह विचार करने का है कि क्या 65 साल में हम लोगों को न्याय मुहैया कराने का लक्ष्य हासिल कर पाने में सफल हुए हैं।
ऐसा माहौल बना पाए हैं, जहां हरेक व्यक्ति को समान उपलब्धि और स्तर हासिल हो। अभी भी देश के लाखों लोगों के लिए न्याय सिर्फ एक भ्रमजाल है जो एक बड़ी आबादी की पहुंच से बाहर है।