फिर फूटा 'काटजू बम', निशाने पर हाईकोर्ट के पुराने जज
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर एक बार फिर न्यायपालिका को आड़े हाथों लिया। अपने नए ब्लॉग में उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक जज पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया।
काटजू के मुताबिक, वह जज बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट का कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश भी बना। उसे सुप्रीम कोर्ट भी लाया गया। नए ब्लॉग में काटजू ने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट का जज रहते हुए उन्होंने पांच अन्य जजों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी।
गौरतलब है कि जस्टिस काटजू ने पिछले महीने मद्रास हाईकोर्ट के एक जज पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। काटजू ने कहा था कि राजनीतिक दबाव के कारण जिला अदालत के एक जज को मद्रास हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज बनाया गया।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चीफ जस्टिस आरएम लोढ़ा ने कहा है कि न्यायपालिका को बदनाम करने के लिए संगठित प्रयास किया जा रहा है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पर आरोप
जस्टिस काटजू ने अपने नए ब्लॉग में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पर भ्रष्टाचार पर आरोप लगाया है। पढ़िए, काटजू के ब्लॉग के अहम हिस्से-
हाईकोर्ट के जज पर ईमानदारी पर लगातार सवाल उठ रहा था, इसी आधार पर उसे इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। समय बीतने के साथ वह इलाहाबाद हाईकोर्ट को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी बना।
कुछ लोगों ने मांग की कि उसे किसी हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस बनाया जाए, बाद में उसे सुप्रीम कोर्ट लाया गया।
उस समय के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसएच कपाड़िया के पास उस जज की काई शिकायतें आई। कपाड़िया ने मुझसे मामले में सही तथ्यों का पता लगाने को कहा।
कपाड़िया को दिए मोबाइल नंबर
काटजू ने लिखा है कि तब वह सुप्रीम कोर्ट के जज थे। उन्होंने आगे लिखा- मुझे उस समय एक कार्यक्रम में शामिल होने इलाहाबाद जाना था। वहां मैंने कुछ वकीलों से संपर्क किया, जिन्हें मैं जानता था।
उन्होंने मुझे तीन मोबाइल नंबर दिए। ये नंबर उन एजेंटों के थे, जिनके जरिए वो जज पैसे लेता था। मैं दिल्ली लौटकर आया तो मैंने ये तीनों नंबर जस्टिस कपाड़िया को दे दिए। उन्हें सलाह दी कि ये तीनों नंबरों को खुफिया एजेंसियों से टेप करवाएं।
जस्टिस काटजू ले लिखा है कि लगभग दो महीने बाद जस्टिस कपाड़िया ने बताया कि उन्होंने मोबाइल की बातचीत टेप करावाई और बातचीत से जज के भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है।
जज के खिलाफ नहीं हुई कड़ी कार्रवाई
काटजू ने अपने ब्लॉग में आगे लिखा है कि जस्टिस कपाड़िया को इसके बाद उस जज को दिल्ली बुलाना चाहिए था और उनका इस्तीफा मांगना चाहिए था। यदि वे इस्तीफा नहीं देते तो मामले को ससंद को भेजना चाहिए था ताकि उन्हें महाभियोग लगाकर हटाया जा सके।
कपाड़िया ने ऐसा नहीं किया, हालांकि उन्होंने उस जज को किसी भी हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस भी नहीं बनने दिया।
काटजू ने कहा कि भारत के अधिकांश मुख्य न्यायाधीश न्यायपालिका के भ्रष्टाचार को उजागर करने से बचते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करने से न्यायपालिका की मानहानि होगी।
पांच जजों पर गंभीर आरोप
जस्टिस काटजू ने सवाल उठाया है कि जजों के भ्रष्टाचार से न्यायपालिका की मानहानि होती है या उन्हें उजागर करने से?
काटजू ने न्यायपलिका के भ्रष्टाचार के बारे में उदाहरण देते हुए आगे लिखा कि जब वे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज थे, पांच जजों की सूची लेकर उस समय के मुख्य न्यायाधीश चीफ जस्टिस आरसी लाहोटी से मिलने दिल्ली आए। ये सभी जज इलाहाबाद हाईकोर्ट के थे और इन पर गंभीर आरोप थे।
सूची देखकर चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या किया जाना चाहिए? काटजू ने जवाब में कहा कि यदि उन्हें आज्ञा दी जाए तो वे 24 घंटे में समस्या को हल कर देंगे। लाहोटी ने पूछा कैसे?
काटजू ने दी सलाह
जस्टिस काटजू ने जवाब दिया, ' मैं रात की ट्रेन से इलाहाबाद जा रहा हूं और वहां जाकर रजिस्ट्रार जनरल से कहूंगा कि उन जजों को फोन करे और कहे कि चीफ जस्टिस का आदेश है उन्हें हाईकोर्ट में प्रवेश नहीं करना है।'
काटजू ने कहा कि हाईकोर्ट के गेट पर पुलिस को तैनात किया जाएगा और उन जजों को घुसने नहीं दिया जाएगा। उनके चैंबर्स बंद कर दिए जाएंगे, उनके सैलरी चेक घर भेज दिए जाएंगे। उन्हें हाईकोर्ट आने की कोई जरूरत नहीं होगी।
पांच जजों का ट्रांसफर
लाहोटी ने काटजू के सलाह के बाद कहा कि ऐसा न करें, अन्यथा नेताओं को एक मौका मिल जाएगा और वे नेशनल ज्यूडिशयल कमीशन बना कर देंगे।
जवाब में काटजू ने कहा कि वे इस मामले में कार्रवाई नहीं करेंगे लेकिन चीफ जस्टिस को उचित कार्रवाई करनी चाहिए। बाद में उन पांच जजों को दूसरे हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया।