गुजरात दंगों पर फैसला देने वाली जज को धमकी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुजरात की पूर्व मंत्री और भाजपा नेता माया कोडनानी, बजरंग दल के पूर्व नेता बाबू बजरंगी तथा 30 अन्य को 2002 के गुजरात दंगों में 97 मुस्लिमों के नरसंहार के जुर्म में सजा सुनाने वाली जज ज्योत्सना याज्ञनिक को धमकी भरे पत्र मिल रहे हैं। याज्ञनिक को अगस्त 2012 से अब तक 22 धमकी भरे पत्र मिल चुके हैं और कई ब्लैंक फोन कॉल्स आ चुके हैं। 62 वर्षीय याज्ञनिक अब रिटायर हो चुकी हैं। याज्ञनिक को धमकाए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एसआईटी गठित कर दी हैं।
सूत्रों के अनुसार याज्ञनिक इस फैसले के कुछ महीनों बाद ही रिटायर हो गई थीं। उनकी सुरक्षा में भी कमी कर दी गई है। याज्ञनिक को जेड प्सल सेक्योरिटी हटाकर उन्हें वाई श्रेणी की सेक्योरिटी प्रदान की गई थी। उनकी सुरक्षा के मामले को सरकार के समक्ष भी उठाया गया है।
पिछले 8 महीनों में किसी तरह की सूचना नहीं
एक अंग्रेजी अखाबर को दिए इंटव्यू में याज्ञनिक ने कहा है कि मुझे धमकी भरे पत्र मिल रहे हैं जिसे मैंने एसआईटी को सूचित कर दिया है। उन्होंने यह बताने से इंकार कर दिया कि धमकी भरे पत्रों में क्या लिखा हुआ है।
इस संबंध में जब एसआईटी संयोजक और एडीशनल डीजीपी आशीष भाटिया ने कहा कि पिछले 6 से 8 महीने में याज्ञनिक सहित किसी भी न्यायाधीश को धमकी भरा पत्र मिला हो, उन्हें इसकी जानकारी नहीं है।
यह पूछने पर कि क्या एसआईटी को किसी भी प्रकार की सूचना याज्ञनिक से मिली थी तो उन्होंने कहा कि 6 से 8 महीने पहले सरकार ने उनकी सुरक्षा में कमी कर दी थी। लेकिन अभी भी उनकी सुरक्षा वाई श्रेणी तक है और उनकी सुरक्षा से संबंधित उनका अनुरोध सरकार के पास लंबित है।
दोनों हैं जेल से बाहर
बताते चले कि 29 अगस्त 2012 को ज्योत्सना याज्ञनिक ने नरोदा पाटिया केस में अपना फैसला सुनाया था। जिसमें कोडनानी और बजरंगी बाबू को आजीवन कारावास की सजा मिली थी।
याज्ञनिक ने इस केस में माया को मुख्य षड़यंत्रकारियों में से एक बताया था। माया पिछले साल जुलाई में बेल पर जेल से छूट कर आईं हैं वहीं इसी साल अप्रैल 23 को बजरंगी भी जेल से बाहर आया है।