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'जस्टिस गांगुली दोषी, पर नहीं कर सकते हैं कार्रवाई'
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Fri, 06 Dec 2013 04:56 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की समिति ने जस्टिस अशोक कुमार गांगुली पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को प्रथम दृष्ट्या सही माना है।
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समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि लॉ इंटर्न के बयानों और अन्य साक्ष्यों से जाहिर होता है कि पूर्व जज ने अवांछित आचरण किया, जो यौन दुर्व्यवहार के दायरे में आता है।
हालांकि चीफ जस्टिस पी सदाशिवम ने यह भी साफ किया है कि सुप्रीम कोर्ट अपने स्तर से जस्टिस गांगुली के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगा क्योंकि पिछले साल 24 दिसंबर को हुई घटना के दिन जस्टिस गांगुली सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो चुके थे और युवती भी इंटर्न के तौर पर सुप्रीम कोर्ट के रोल पर नहीं थी।
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लेकिन सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट सामने आने के बाद जस्टिस गांगुली के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग तेज हो गई है। साथ ही उनसे पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष का पद छोड़ने की मांग भी की जा रही है।
चीफ जस्टिस की ओर से जारी बयान के मुताबिक समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हमने इंटर्न के मौखिक और लिखित बयानों, उसकी ओर से पेश तीन गवाहों के हलफनामों और जस्टिस गांगुली के बयानों की समीक्षा की।
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इससे जाहिर होता है कि लड़की पिछले साल 24 दिसंबर की शाम जस्टिस गांगुली के काम में उनकी मदद करने ली मेरेडियन होटल पहुंची थी। अपने बयान में जस्टिस गांगुली ने भी इस बात को माना है। लड़की के बयानों से प्रथम दृष्ट्या साफ होता है कि होटल के कमरे में रात आठ बजे से साढ़े दस बजे के बीच जस्टिस गांगुली ने उसके साथ अवांछित व्यवहार किया।
रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस गांगुली की बातचीत और आचरण यौन प्रकृति का था। चीफ जस्टिस की ओर से जारी दो पेजों के बयान में इंटर्न का नाम भी जाहिर किया गया है।
चीफ जस्टिस ने कहा कि चूंकि मीडिया में प्रकाशित खबर में कथित रूप से कहा गया था कि वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश थे। इसी के बाद एक समिति गठित की गई थी जिसकी रिपोर्ट आ गई है।
चीफ जस्टिस के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के सभी जजों (फुल कोर्ट) की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि पूर्व न्यायाधीशों के खिलाफ दायर शिकायतें सुप्रीम कोर्ट के प्रशासन द्वारा विचार योग्य नहीं हैं। रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया गया है कि समिति की रिपोर्ट की प्रति इंटर्न और जस्टिस गांगुली को भेज दी जाए।
तत्काल दर्ज हो एफआईआर
सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जय सिंह और वरिष्ठ अधिवक्ता पिनाकी मिश्रा ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट की समिति की रिपोर्ट के बाद पुलिस को खुद संज्ञान लेकर जस्टिस गांगुली के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज करनी चाहिए।
जस्टिस गांगुली का कुछ भी कहने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट की ओर से यौन उत्पीड़न के आरोपों को सही माने जाने के बाद जस्टिस गांगुली ने इस मामले में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मैं आरोपों को पहले ही खारिज कर चुका हूं, अब आगे और क्या कहूं। मुझे नहीं मालूम है कि सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है। इसलिए मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।
क्या थे आरोप
लॉ इंटर्न ने ब्लॉग पर आरोप लगाए थे कि सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जस्टिस ने पिछले साल दिसंबर में एक होटल के कमरे में उसके साथ यौन दुर्व्यवहार किया। मीडिया में 12 नवंबर को इस मामले के खुलासे के बाद चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के जजों जस्टिस आरएम लोढ़ा, एचएल दत्तू और रंजना प्रकाश देसाई की समिति मामले की जांच के लिए गठित की थी। समिति ने 28 नवंबर को अपनी रिपोर्ट चीफ जस्टिस को सौंप दी थी।
अब आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति की ओर से तैयार रिपोर्ट की एक प्रति जस्टिस गांगुली और एक प्रति इंटर्न को भिजवाई गई है। मामले में आगे क्या कदम उठाना है, यह फैसला परोक्ष तौर पर दोनों पक्षों पर छोड़ा गया है।
भाजपा और तृणमूल ने मांगा इस्तीफा
समिति की रिपोर्ट के भाजपा नेता सुषमा स्वराज और तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने जस्टिस गांगुली से पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटने की मांग की है। उन्होंने कहा कि अब यह साबित हो गया है कि जस्टिस पर लगे आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं। उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए, ताकि इस पद की गरिमा बरकरार रखी जा सके।
एनजीओ की शिकायत जीडी के तौर पर दर्ज
यौन उत्पीड़न मामले में एक एनजीओ की ओर से जस्टिस गांगुली के खिलाफ दी गई शिकायत को कोलकाता पुलिस ने जीडी (जनरल डायरी) के तौर पर दर्ज कर लिया है। भारत बचाओ संगठन की ओर से यह शिकायत कोलकाता पुलिस को दी गई थी।