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लैंडलाइन की तरह मोबाइल चलाने का जुगाड़, आप जानते हैं?

Sun, 27 Sep 2015 08:31 AM IST
Updated Sun, 27 Sep 2015 08:31 AM IST
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'Jugaad', how to use mobile as landline phone

बिहार के पश्चिम चंपारण जिले का दोन इलाका बाल्मीकि टाइगर रिजर्व का हिस्सा है। थारू आदिवासी बहुल इस इलाके की दो पंचायतों के तहत 25 गांव आते हैं। ये गांव यूँ तो दूसरे गांवों की ही तरह हैं, लेकिन जो चीज आकर्षित करती है वो है घरों में लगे ऊँचे एंटीने। ये गांव हिमालय की शिवालिक पर्वत शृंखला के सोमेश्वर पहाड़ों के बीच बसे हैं। इन गांवों में बांस पर एक तय ऊंचाई पर लगे एंटीना के जरिए ही मोबाइल नेटवर्क मिलता है।

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एंटीना काम कैसे करता है? इस बारे में बेथानी दोन के रोहित महतो बताते हैं, ‘‘एंटीना से लगे तार का एक सिरा घर के अंदर रहता है। मोबाइल को तार के इस सिरे से लपेट कर रखने पर कामचलाऊ नेटवर्क मिल जाता है।’’ इस जुगाड़ तकनीक के कारण इलाके में मोबाइल भी लैंडलाइन की तरह ही इस्तेमाल हो रहा है। गोबरहिया दोन के रामविनय काजी यह परेशानी कुछ इस तरह बयान करते हैं, ‘‘एंटीना पर निर्भर रहने के कारण पॉकेट में रखने वाला मोबाइल घर में ही पड़ा रहता है।’’
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एल्यूमीनियम के छड़ों से बने ऐसे एंटीना की कीमत करीब पांच से सात सौ रुपए होती है। यह इलाके के लोगों को रामनगर और हरनाटांड के बाजारों में आसानी से मिल जाता है। इस एंटीना के जरिए भी केवल बात-चीत ही हो पाती है। इंटरनेट का नेटवर्क नहीं मिल पाता है। ऐसे में यहां के लोग, खासकर युवा सोशल साइट्स और दूसरी वेबसाइट्स की जानकारी होने के बाद भी इनका इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं।

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‘इनकमिंग मुफ्त नहीं'

'Jugaad', how to use mobile as landline phone

रामविनय कहते हैं, ‘‘हमलोग फेसबुक और दूसरे वेबसाइट्स से वंचित हैं। ऐसे में लगता है कि हमलोग दुनिया से कटे हुए हैं। पचास साल पीछे हैं।’’ इलाके में बिजली भी नहीं पहुंची हैं। ऐसे में लगभग हर उस घर में लोग बिजली के लिए सोलर पैनल्स का इस्तेमाल भी करते हैं जिस घर में मोबाइल है।

पिपरा दोन के देवराज महतो बताते हैं कि इलाके में मोबाइल के कारण ही सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ा है। शहरों में टेलीफोन बूथ अब भले ही न के बराबर दिखाई देते हों लेकिन दोन इलाके में एंटीना के जरिए कुछ लोग ‘टेलीफोन बूथ’ भी चलाते हैं। वे एक तय राशि लेकर लोगों की बात तो कराते ही हैं। साथ ही ‘इनकमिंग सेवा’ भी मुहैया कराते हैं। रामनगर की गुलिश्ता खातून पिपरा दोन के सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं।

गुलिश्ता बताती हैं, ‘‘बूथ वालों के नंबर हमने अपने घरवालों को दे रखे हैं। इनके यहां हमारे नाम कोई खास मैसेज आता है तो वे उसे पहुंचाने के एवज में भी पैसे लेते हैं।’’ दोन इलाके के लोगों के मुताबिक कंपनियां तो मोबाइल टावर लगाना चाहती हैं, लेकिन वन विभाग के अधिकारी वन्य जीवों के सुरक्षा के नाम पर इसकी इजाजत नहीं दे रहे हैं।

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