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निजता कानून के दायरे में न हो पत्रकारिता
नई दिल्ली/एजेंसी
Updated Tue, 23 Oct 2012 07:36 AM IST
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सरकार की ओर से नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति ने पत्रकारिता की गतिविधियों को प्रस्तावित निजता कानून के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश एपी शाह के पैनल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पत्रकारिता और कलात्मक गतिविधियों के लिए निजी सूचना प्रकाशित करने को प्रस्तावित कानून के तहत निजता का उल्लंघन नहीं माना चाहिए।
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रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, जनहित के खुलासों, आपराधिक मामलों के अभियोगों में सरकार निजता के कानून से छूट दे सकती है। स्टिंग ऑपरेशन या भ्रष्टाचार का खुलासा करने के मामलों में भी जनहित को देखने की जरूरत है। इसमें यह देखा जाना चाहिए कि निजी सूचना के खुलासे के साथ सभी सुबूत तो मौजूद हैं।
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हालांकि पैनल ने कहा है कि कुछ पाबंदियां जरूरी होंगी क्योंकि ऐसे मामलों में जानी मानी हस्तियों या सामान्य लोगों की निजी सूचना सार्वजनिक हो जाती है। दिल्ली हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एपी शाह के नेतृत्व में योजना आयोग ने पिछले साल सितंबर में इस पैनल का गठन किया था।
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