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सचमुच का भी है एक जॉली एलएलबी!

Wed, 20 Mar 2013 09:11 PM IST
नई दिल्ली/धीरज बेनीवाल
नई दिल्ली/धीरज बेनीवाल Updated Wed, 20 Mar 2013 09:11 PM IST
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Jolly LLB is also literally!
'अपील' की जगह 'ऐपल', 'प्रोसीक्यूशन' की जगह 'प्रॉस्टीट्यूशन' कहा जाए तो हम झट से कहेंगे जॉली एलएलबी का डायलॉग मार रहा है। अगर मैं कहूं कि ऐसी गलतियां आठ साल पहले कड़कड़डूमा कोर्ट के एक वकील का मुंशी कर चुका है तो आप क्या कहेंगे। यह हकीकत है जनाब, सुविधा के लिए हम इसे इत्तफाक कह सकते हैं।
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अब डायलॉग बन चुकी अंग्रेजी की यह गलतियां जब यह मुंशी करता था तब एक वकील का मुंशी आठ साल पहले करता था। तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि यह गलतियां भविष्य में फिल्म जौली एलएलबी के डायलॉग होंगे।
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यह बात और है जॉली एलएलबी सिनेमाघरों में जलवा बिखेर रही है। यह फिल्म कड़कड़डूमा कोर्ट के वकीलों को भी यह फिल्म काफी पसंद आ रही है। एक खास इत्तफाक है जो इस फिल्म के साथ जुड़ा है। आठ साल पहले अंगेजी की यह गलतियां करने वाला मुंशी अब खुद वकील बन चुका है। क्या यह महज इत्तफाक है।
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कड़कड़डूमा कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता ने बताया कि आठ साल पहले एक वकील का मुंशी अंग्रेजी में अक्सर ऐसी गलतियां करता था। वह 'अपील' को 'ऐपल' और 'प्रोसीक्यूशन' को 'प्रॉस्टीट्यूशन' कहता है, लेकिन समय के साथ मुंशी ने वकालत कर ली है। जब उससे यह पुरानी बातें की जाती हैं तो वह झेंप जाता है।

जॉली एलएलबी का नायक जगदीश त्यागी मेरठ लॉ कॉलेज से वकालत पढ़ कर आया है और अंगेजी में हाथ तंग होने के कारण् बड़ी उटपटांग गलतियां करता है। लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है।

एक अधिवक्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कड़कड़डूमा अदालत में प्रैक्टिस करने वाले वकीलों की बड़ी तादाद उनकी है जो मेरठ से एलएलबी करके आए और अच्छा काम कर रहे हैं। उनकी माने तो यहां पर तकरीबन 50 फीसदी वकील मेरठ से एलएलबी किए हुए हैं।


मेरठ से एलएलबी करके आए कई वकील तो ऐसे हैं जिन पर पहले संगीन धाराओं में आपराधिक मुकदमे चल चुके हैं, लेकिन वह अपराध का रास्ता छोड़ कर अब वकालत कर रहे हैं। तो दूसरी ऐसे वकील भी हैं जो जॉली के रास्ते पर हैं। एक अधिवक्ता ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर बताया कि कई साथी तो ऐसे हैं जो 1200 किलोमीटर पत्र भेजना हो तो 10 रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से 12 हजार रुपए तक मुद्दई से वसूल लेते हैं। 
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