फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   John Michael Cunha had handled Uma Bharti case too

एक ही जज ने छीन ली दो सीएम की कुर्सी

Mon, 29 Sep 2014 09:17 PM IST
Updated Mon, 29 Sep 2014 09:17 PM IST
विज्ञापन
John Michael Cunha had handled Uma Bharti case too

भ्रष्टाचार के मामले में जे जयललिता को चार साल की सजा दी गई है। बंगलौर की विशेष अदालत ने 18 साल पुराने मुकदमे में तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री पर 100 करोड़ रुपए का जुर्माना भी लगा दिया है।

विज्ञापन


मुख्यमंत्री पद पर बैठे किसी राजनीतिज्ञ को दी गई अब तक की ये सबसे बड़ी सजा है। किसी राजनीतिज्ञ पर पहली बार इतनी बड़ी मात्रा में जुर्माना भी लगाया गया है। सजा के ऐलान के बाद जयललिता के मामले की सुनवाई कर रहे जज जॉन माइकल कुन्हा भी चर्चा में हैं। 
विज्ञापन


कुन्हा मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के मामले में भी सुनवाई कर चुके हैं। कर्नाटक के हुबली में 1994 में उमा भारती समेत 21 अन्य पर ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने के आरोप में मुकदमा दर्ज किया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

उमा भारती ने भी गंवा दी थी सीएम की कुर्सी

John Michael Cunha had handled Uma Bharti case too

अगस्त, 1994 में उमा भारती ने हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा झंडा फहराया था। दरअसल, वह मैदान विवादित था और प्रशासन ने वहां किसी भी प्रकार की सभा न करने की आदेश दिया था।

उमा भारती समेत कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने आदेश का उल्लंघन किया और ईदगाह मैदान में सभा करने के प्रयास ‌किया। उस दौरान उन्होंने वहां तिरंगा झंडा फहराया था। सितंबर 2004 में कुन्हा ही अदालत में उसी मामले में एक पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। याचिका उमा भारती और 21 अन्य पर निचली अदालत में चल रहे मुकदमे को वापस लेने के संबंध में थी।

कुन्हा ने याचिका रद्द कर दी, जिसके बाद ये मुकदमा आगे बढ़ा। मामले में उमा भारती के खिलाफ वारंट जारी किया गया। उस समय वह मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री थी। उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा।

सरकारी वकील पर भी लगा दिया था जुर्माना

John Michael Cunha had handled Uma Bharti case too

मंगलौर के रहने वाले कुन्हा को बहुत ही लो प्रोफाइल माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद वे जयललिता के मामले की रोजाना सुनवाई कर रहे थे।

विशेष अदालत का जज नियुक्त होने से पहले धारवाड़ और बंगलौर में वह मुख्य जिला और सत्र न्यायाधीश थे। कर्नाटक हाईकोर्ट में वह रजिस्ट्रार (विजिलेंस) भी रह चुके हैं।

जयललिता के मामले से वह नवंबर, 2013 को जुड़े थे। उससे पहले इस मामले में जज एमएस बालाकृष्‍णन थे। कुन्हा ने सुनवाई के दौरान जयललिता के केस से जुड़े किसी भी व्यक्ति से मुलाकात नहीं की।

खुली अदालत में ही वह सारी बातें सुनते थे। इसी साल मार्च में उन्होंने इस मामले में सरकारी वकील जी भवानी स‌िंह पर 60 हजार रुपए का जुर्माना लगा दिया। भवानी पर आरोप था कि वह बिना किसी ठोस कारण के सुनवाई की तारीख आगे बढ़ा रहे थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed