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जिंदल उगाही मामलाः सुभाष चंद्रा ने नष्ट किए अहम सबूत

Tue, 13 Aug 2013 12:02 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 13 Aug 2013 12:02 AM IST
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jindal extortion case subhash chandra destroy crucial evidence

जिंदल स्टील से उगाही की कोशिश मामले में अभियुक्त जी समूह के चेयरमैन सुभाष चंद्रा, संपादक समीर आहलूवालिया व सुधीर चौधरी ने जांच में सहयोग नहीं किया और साक्ष्यों को नष्ट कर दिया।

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चंद्रा ने अपना मोबाइल जांच एजेंसी को सौंपने की बजाए उसके गुम होने का तर्क रखा। पुलिस द्वारा इन तीनों के खिलाफ दायर आरोप पत्र में ऐसे कई तथ्यों का खुलासा हुआ है।
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आरोप पत्र में कहा गया है कि इस मामले में शिकायत दर्ज होने के बाद तीनों ने स्वयं को बचाने के लिए साक्ष्यों को नष्ट करने का पूरा प्रयास किया।

जांच के दौरान चंद्रा से वह फोन व सिम कार्ड मांगा गया, जिसके जरिए वे सितंबर व अक्तूबर 2012 में विदेश में रहते हुए समीर व सुधीर से बात रहे थे।

मगर चंद्रा ने तर्क रखा कि उनका फोन फरवरी 2013 में सिम सहित गुम हो गया। जांच अधिकारी ने जब उनसे फोन गुम होने की रिपोर्ट की प्रति मांगी, तो वह पेश नहीं कर पाए।
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जांच अधिकारी के अनुसार, चंद्रा ने माना कि वह उक्त फोन का प्रयोग विदेश रहते समय कर रहे थे। इतना ही नहीं, चंद्रा ने कहा कि वे लैपटॉप का प्रयोग नहीं करते थे और न ही उन्होंने विदेश रहते हुए संपादकों को कोई ई-मेल किया था।

आरोपपत्र के अनुसार, इस बात के पूरे साक्ष्य हैं कि वे सितंबर व अक्टूबर के दौरान संपादकों से संपर्क में थे और जिंदल कंपनी के अधिकारियों से हुई वार्ता की पूरी जानकारी ले रहे थे।

इसी प्रकार संपादक समीर व सुधीर ने अपने फोन से सिंतबर-अक्टूबर 2012 का डाटा हटवा दिया, जो एक महत्वपूर्ण साक्ष्य था।

जांच अधिकारी के अनुसार, सीएफएसएल की रिपोर्ट से भी यह स्पष्ट हुआ है कि दोनों संपादकों ने कंपनी के चेयरमैन नवीन जिंदल का साक्षात्कार लेने के बावजूद उनका पक्ष नहीं दिखाया। दोनों संपादक न्यूज चलाने के लिए जिम्मेदार हैं।


आरोप पत्र में पुलिस ने इन तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 384, 120बी, 511, 420, 201 के तहत आपराधिक उगाही, उगाही के लिए षड्यंत्र, धोखाधड़ी व साक्ष्य नष्ट करने के अपराध में कानूनी कार्रवाई का आग्रह किया है।

इन धाराओं में दोषी पाए जाने पर उन्हें आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।

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