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'बदमाशों ने खिलाई दाल मखनी, सुबह-शाम पिलाते थे दूध'

Updated Fri, 03 Apr 2015 04:01 PM IST
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jeweller Pradeep Verma tries from punks

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मैंने जैसे ही अपनी दुकान का शटर खोला, एक बदमाश ने मेरी कनपटी पर बंदूक लगा दी। बोला, हम मेरठ क्राइम ब्रांच से हैं, हमारे साथ चल। अगले ही पल स्कॉर्पियो का पीछे का गेट खोलकर मुझे उसमें डाल लिया। थोड़ी देर बाद गाड़ी रुकी हिसावदा गांव में।
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प्रदीप वर्मा बताते हैं कि बदमाश छह थे। उन्होंने हिसावदा में स्कॉर्पियो छोड़ दी। वह खराब नहीं हुई थी। वहां बोलेरो आ गई। सभी बदमाश मुझे लेकर उसमें बैठ गए। फिर थोड़ी दूर जाकर एक बदमाश ने मुझसे पूछा मोबाइल दे, मैंने कहा मेरा फोन दुकान में छूट गया। उन्होंने मुझसे मेरे पापा का नंबर लिया और फोन मिलाया। उनसे मेरी बात कराई और फिरौती मांगी।


मुझे नहीं पता मैं कहां था, लेकिन एक घंटा हो चुका था। इसके बाद गाड़ी दोपहर के तीन बजे तक चलती रही। मेरी आंखों पर पट्टी बांध दी। मुझे नींद की गोलियां खिला दी। मुझे होश आया, तो एक कमरे में था। वहीं  छह बदमाश मेरे साथ रहे। अगले दिन वहां राहुल खट्टा आया।
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राहुल खट्टा ने किया था अपहरण

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