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'हम भीख नहीं अपने अधिकार मांगने आए हैं'
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Sun, 17 Mar 2013 05:22 PM IST
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित अधिकार रैली में बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई।
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नीतीश ने भारत और इंडिया का अंतर खत्मकर समावेशी विकास के जरिए समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और आर्थिक नीतियों में बदलाव लाने का आह्वान किया।
विशेष राज्य के मुद्दे पर बिहार में कई रैलियां आयोजित कर चुके नीतीश कुमार ने पहली बार दिल्ली में अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने की कोशिश की।
रैली में नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार के विशेष राज्य अभी नहीं दिया गया तो 2014 में जो सरकार आएगी उसे बिहार को विशेष राज्य का जरूर देना होगा।
उन्होंने कहा कि 2014 का इस्तेमाल बिहार के लोग ऐसे अवसर के रूप करेंगे, जिससे उनकी मांग मानी जा सके।
नीतीश ने केंद्र की यूपीए सरकार को चुनौती देते हुए कहा, '2014 में दिल्ली की कुर्सी पर वही सरकार बैठेगी, जिसे पिछड़े राज्यों के हितों की चिंता होगी। उन्होंने कहा, 'हम न बाएं देख रहे हैं और ना दाएं। हम सीधे देख रहे हैं। केंद्र में वही सरकार होनी चाहिए जिसे हमारे हितों की चिंता हो।'
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उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले तो यह भी तेजी से विकास कर सकता है।
दिल्ली में बिहारी
जदयू की रैली में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रह रहे हजारों बिहारी नागरिकों ने हिस्सा लिया। रैली में नीतीश कुमार कुमार ने कहा कि दिल्ली में भी जो बिहारी रहते हैं, वे मेहनत और हुनर की बदौलत कमाते हैं लेकिन वे तंग गलियों में रहते हैं। उन्हें वो सुख सुविधा उपलब्ध नहीं है और वे पिछडे़ इलाकों में रहते हैं।
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दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि राजधानी में बिहारियों की ताकत की पहचान बनी है। इस ताकत से दिल्ली की तख्त-ओ-ताज भी चौपट हो जाएगा। वे इस उभरती ताकत को पहचान लें।
उन्होंने कहा कि आज इस रैली में भाग लेने आए बिहारी भीख मांगने नहीं आए हैं, बल्कि अपने अधिकारों को मांगने आए है।
पिछड़ा बिहार
जनता दल (यू) की रैली में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार के पिछड़ेपन को मुद्दे के रूप में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बिहार पिछड़ा राज्य है। वहां प्रतिव्यक्ति आय का औसत राष्ट्रीय औसत से कम है। सकल घरेलू उत्पाद में उसका योगदान भी कम है।
उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा मिले तो वह भी देश के विकास में मदद कर सकता।
अपने राज्य की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, 'बिहार एक लैंड लॉक्ड स्टेट है। वहां संसाधनों का अभाव है। दुनिया भर में जो लैंड लॉक्ड देश हैं, उन्हें विशेष सहायता दी जाती है।'
उन्होंने कहा कि बिहार एक पिछड़ा राज्य है, इसे प्रधानमंत्री द्वारा बनाई गई कमेटी भी मान चुकी है लेकिन उसने हमें विशेष राज्य का दर्जा देने की सिफारिश नहीं की। कमेटी के मुताबिक हम मानदंडों पर खरे नहीं उतरते।
विशेष राज्य के मानदंडो को बदलने की मांग करते हुए नीतीश कुमार ने कहा 'वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने बजट भाषण विशेष राज्य के मानदंडों में बदलाव की बात सिद्घांततः मान ली है। अब उन्हें इसे जल्दी से पूरा करना चाहिए।'
समावेशी विकास
देश में समावेशी विकास की वकालत करते हुए नीतीश ने कहा कि केवल बिहार को ही नहीं, सभी पिछडे़ राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विशेष राज्य का दर्जा देने के मानदंडों और नीतियों में बदलाव लाने की जरुरत है क्योंकि तभी पूरे देश का समावेशी विकास हो सकता है और देश की विकास दर बढ़ सकती है।