फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   jdu may help congress in monsoon session

कांग्रेस का नया संकटमोचक होगा जदयू

Mon, 22 Jul 2013 12:05 AM IST
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र
नई दिल्ली/हिमांशु मिश्र Updated Mon, 22 Jul 2013 12:05 AM IST
विज्ञापन
jdu may help congress in monsoon session

अब तक सपा और बसपा के सहारे संसद सत्र की गाड़ी खींचने वाले यूपीए को मानसून सत्र में एक और संकटमोचक मिलने की पूरी उम्मीद है।

विज्ञापन


भाजपा से 17 साल पुराना संबंध खत्म होने के बाद जद-यू यूपीए का नया संकटमोचक साबित हो सकता है। इसके लिए कांग्रेस लगातार जद-यू पर डोरे डाल रही है। जद-यू की तरफ से भी उसे सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खाद्य सुरक्षा विधेयक का समर्थन करने का संकेत दे कर अपना भावी रुख स्पष्ट कर दिया है।

हालांकि इसके बदले नीतीश की योजना यूपीए सरकार से मोलभाव करने की है, जिससे बिहार में विकास कार्य जारी रहने का राजनीतिक संकेत दिया जा सके।

इसके लिए नीतीश सत्र के दौरान पटना से ही पार्टी सांसदों को नियंत्रित करेंगे। हालांकि जद-यू और कांग्रेस की यह गाड़ी किन-किन मुद्दों पर कितनी दूर तक सफर करेगी, इस पर दोनों दल अपना रुख स्पष्ट नहीं कर रहे हैं।
विज्ञापन


दरअसल, भाजपा-जदयू के अलगाव से सबसे ज्यादा खुश कांग्रेस है। नई परिस्थितियों में कांग्रेस और जद-यू दोनों को ही एक दूसरे की जरूरत है। कांग्रेस की तात्कालिक जरूरत जद-यू की सहायता से मानसून सत्र में महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


उधर, जदयू की रणनीति राज्य के लिए अधिक से अधिक केंद्रीय मदद हासिल करने की। यही कारण है कि अलगाव के बाद महाबोधि मंदिर में हुए आतंकी हमला और सारण में जहरीले मिड डे मील से हुई दो दर्जन बच्चों की मौत के बाद भी कांग्रेस का रुख रक्षात्मक रहा।

इसके एवज में यूपीए सरकार की गेमचेंजर मानी जाने वाली खाद्य सुरक्षा योजना को नीतीश ने अच्छी योजना बताया। हालांकि अलगाव के बाद भी इस मामले में अध्यादेश जारी करने पर पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने यूपीए सरकार की तीखी आलोचना की थी।

वैसे भी भाजपा से दूरी बनाने के बाद नीतीश की योजना राज्य में विकास के पहिये को थमने नहीं देने का है। उनकी रणनीति केंद्रीय सहायता से विकास के पहिये को और गति देने की है, जिससे राज्य में जद-यू और सरकार के प्रति सकारात्मक रुख पैदा हो।


इसके लिए नीतीश की यूपीए सरकार का समय-समय पर बचाव करना मजबूरी है। जद-यू सूत्रों का कहना है कि नीतीश के नए रुख से सबसे अधिक परेशानी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव को होगी।

अब तक घोर कांग्रेस विरोध की राजनीति करते रहने वाले शरद को ही लोकसभा में विभिन्न विधेयक पर कांग्रेस का समर्थन करने के तर्क तलाशने होंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed