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गठबंधन बचाने को आगे आए लालकृष्ण आडवाणी
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2013 05:00 PM IST
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एनडीए गठबंधन टूटने और तीसरे मोर्च के गठन की कवायद की खबरों में बीच अब खुद भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी गठबंधन बचाने के लिए आगे आए हैं।
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आडवाणी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए के संयोजक शरद यादव से फोन पर बात की है। सूत्रों की मानें तो फोन पर आडवाणी ने जदयू के दोनों नेताओं से एनडीए से अलग नहीं होने का आग्रह किया है।
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इससे पहले शरद यादव ने कहा कि भाजपा के साथ गठबंधन बरकरार रहेगा। उन्होंने कहा कि लोग नेताओं की बयानबाजी पर ध्यान न दें।
शरद यादव ने कहा, 'दोनों दलों के बीच जिन मुद्दों पर मतभेद है, उनपर मिल-बैठकर बात की जाएगी और उन्हें निपटा लिया जाएगा। हालांकि ये गठबंधन बरकरार रहेगा।'
गौरतलब है कि जदयू के भाजपा के साथ गठबंधन में बने रहने पर संशय बना हुआ है। जदयू प्रवक्ता और सांसद शिवानंद तिवारी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से रुकने और इंतजार करने की बात कही है।
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माना जा रहा है कि गठबंधन पर फैसला एक हफ्ते के अंदर होने की संभावना है। नीतीश कुमार भी अपनी 'सेवा' यात्रा से 15 जून को लौट रहे हैं। इसके बाद इस मुद्दे पर फैसला हो सकता है।
जदयू प्रवक्ता संजय सिंह ने आज कहा था कि जदयू और भाजपा के बीच सब कुछ खत्म हो चुका है। पार्टी गठबंधन के बारे में जल्द फैसला लेगी।'
इसके बाद आशंका जताई जाने लगी थी कि जदयू और भाजपा गठबंधन कभी भी टूट सकता है। बताया जा रहा था कि जदयू भाजपा की लोकसभा चुनाव की कमान नरेंद्र मोदी को सौंपे जाने से नाराज है।
बिहार के कृषिमंत्री व जदयू नेता नरेंद्र सिंह ने भी कहा था कि भाजपा ने अपनी कमान एक 'दागी' के हाथ में सौंप दी है। उन्होंने कहा कि अब ये गठबंधन टूट चुका है।
वहीं, बिहार प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मंगल पांडेय ने कहा है कि भाजपा गठबंधन को चलाना चाहती है लेकिन पार्टी जदयू के आरोपों का जवाब देगी।
कांग्रेस कर रही रिझाने की कोशिश
वहीं जदयू में चल रहे इस घटनाक्रम को देखते हुए कांग्रेस ने उसे रिझाने की कोशिश की है। कांग्रेस के संसदीय कार्यमंत्री कमलनाथ ने बुधवार को कहा कि कांग्रेस में सभी धर्मनिरपेक्ष दलों का स्वागत है। हालांकि उन्होंने समय पूर्व चुनाव से इंकार किया है।
इसी तरह कांग्रेस के नेता राजीव शुक्ला ने जदयू के धर्मनिरेपक्षता का साथ न छोड़ने पर तारीफ की है। उन्होंने कहा कि हमें देश में शांति बनाए रखने के लिए और धर्मनिरपेक्ष ताकतों की जरूरत है।