फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   jbt scam om prakash chautala and 54 others sent to tihar jail

शिक्षक भर्ती घोटालाः बेटे समेत चौटाला तिहाड़ भेजे गए

Wed, 16 Jan 2013 11:21 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी
नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी Updated Wed, 16 Jan 2013 11:21 PM IST
विज्ञापन
jbt scam om prakash chautala and 54 others sent to tihar jail

हरियाणा में 12 साल पुराने जूनियर शिक्षक भर्ती घोटाले में बुधवार को दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, उनके बेटे अजय चौटाला और 53 अन्य आरोपियों को दोषी करार दिया। इस फैसले के साथ ही सभी 55 दोषियों को हिरासत में लेने के बाद तिहाड़ जेल भेज दिया गया। अदालत में 17, 19 और 21 जनवरी को सजा पर बहस होगी। सजा 22 जनवरी को सुनाई जाएगी।

विज्ञापन

 
रोहिणी स्थित विशेष सीबीआई जज विनोद कुमार ने 308 पेज के अपने फैसले में इंडियन नेशनल लोकदल के प्रमुख ओमप्रकाश चौटाला को घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता करार दिया। वर्ष 1999-2000 के दौरान 3206 जूनियर बेसिक ट्रेंड (जेबीटी) शिक्षकों की भर्ती में घोटाले के इस मामले में पूर्व आईएएस संजीव कुमार, पूर्व आईएएस विद्याधर, मौजूदा विधायक शेर सिंह बडशामी और 16 महिला अधिकारियों को भी दोषी करार दिया गया है।
विज्ञापन


अदालत ने कहा कि सभी आरोपी धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े, आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत पद के दुरुपयोग के दोषी हैं। चौटाला की शह पर राज्य सरकार के अधिकारियों ने इस घोटाले को अंजाम दिया। कोर्ट ने तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक संजीव कुमार के बयान को अहम माना।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि साफ है कि चौटाला ने संजीव कुमार को प्राथमिक शिक्षा निदेशक नियुक्त करते हुए उनसे नियुक्तियों की पहले से तैयार सूची को बदलकर दूसरी सूची तैयार करने को कहा था। चौटाला की आईएनएलडी को 2000 में हरियाणा में पूर्ण बहुमत मिला था। उसी साल यह घोटाला हुआ।

मालूम हो कि संजीव कुमार ने ही सबसे पहले इस घोटाले का खुलासा किया था, लेकिन सीबीआई जांच में वह खुद भी इसमें लिप्त पाए गए। विद्याधर तब चौटाला के ओएसडी थे, जबकि बडशामी उनके राजनीतिक सलाहकार थे। फैसला सुनाए जाने के दौरान कोर्ट रूम में 55 आरोपी, उनके वकील, अभियोजक और कोर्ट का स्टाफ ही मौजूद था। जज ने और किसी को अंदर आने की इजाजत नहीं दी।

संजीव कुमार ने वर्ष 2003 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी। सीबीआई ने वर्ष 2004 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जेबीटी मामले की जांच शुरू की थी। जांच एजेंसी ने 2008 में कुल 62 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। सीबीआई अदालत ने जुलाई 2010 में आरोप तय किए।

मामले की सुनवाई करीब ढाई साल पहले सीबीआई अदालत में शुरू हुई थी। इस दौरान अभियोजन पक्ष के 68 और बचाव पक्ष के 25 गवाहों की गवाही हुई। अभियोजन पक्ष के गवाहों में तीन आईएएस अधिकारियों रजनी शेखर सिब्बल, विष्णु भगवान व पीके महापात्रा की गवाही काफी अहम रही।

क्या है मामला
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक हरियाणा में इनेलो की सरकार बनने के बाद वर्ष 1999-2000 में राज्य में जेबीटी टीचर की भर्ती का कार्यक्रम बनाया गया। चौटाला सरकार ने भर्ती का अधिकार एसएससी से लेकर अपने पास रख लिया और इसके लिए जिला स्तर पर समितियां गठित कर दीं।

चार्जशीट के मुताबिक 3206 जूनियर बेसिक ट्रेंड (जेबीटी) टीचर्स की नियुक्ति में ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। नियुक्तियों की दूसरी लिस्ट 18 जिलों की चयन समिति के सदस्यों और अध्यक्षों को हरियाणा भवन और चंडीगढ़ के गेस्ट हाउस में बुलाकर तैयार कराई गई। इसमें जिन अयोग्य उम्मीदवारों से पैसा मिला था उनके नाम योग्य उम्मीदवारों की सूची में डाल दिए गए।

कर दिए थे दो आईएएस के ट्रांसफर
घोटाले के लिए चौटाला ने प्राथमिक शिक्षा निदेशक के पद से दो आईएएस के ट्रांसफर कर दिए थे। कोर्ट ने फैसले में कहा है कि आईएएस अफसर आरपी चंद्रशेखर (तत्कालीन प्राथमिक शिक्षा निदेशक) ने अप्रैल 2000 में योग्य उम्मीदवारों की सूची जारी करने का प्रस्ताव दिया था, जिसके बाद अगले ही दिन उनका ट्रांसफर कर दिया गया।

कोर्ट ने कहा कि इसके बाद 1986 बैच की आईएसएस अधिकारी रजनी शेखर सिब्बल शिक्षा विभाग की निदेशक बनाया गया। जब उन्होंने इस नियुक्तियों की सूची में बदलाव करने से इनकार कर दिया तो उनका भी ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद वर्ष 1985 बैच के अधिकारी संजीव कुमार को शिक्षा विभाग का निदेशक बनाया गया। मामले में आरपी चंद्रशेखर और रजनी शेखर सिब्बल गवाह हैं।

जेल में लटका चौटाला का चेहरा
ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला को तिहाड़ जेल नंबर चार के वार्ड नंबर 15 में रखा गया है। जबकि अन्य आरोपियों को जेल नंबर पांच में रखा गया है। चौटाला पिता-पुत्र को जिस जेल में रखा गया है, उसी जेल में वसंत विहार गैंगरेप के आरोपी मुकेश और अक्षय भी बंद हैं। पिता-पुत्र दोनों को साढ़े चार बजे तिहाड़ लाया गया था। तिहाड़ पहुंचते ही चौटाला के चेहरे पर मायूसी साफ देखी गई। रात में जेल की रोटी-सब्जी भी खाने को दी गई।

राजनीतिक कैरियर पर संकट
अदालत के इस फैसले से चौटाला पिता-पुत्र के राजनीतिक कैरियर पर संकट के बादल घिर गए हैं। जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 8 में प्रावधान है कि दोषी करार दिया गया और दो साल या उससे ज्यादा की सजा पा चुका उम्मीदवार अयोग्य होता है। वह चुनाव नहीं लड़ सकता है। उस पर यह प्रतिबंध दोषी करार दिए जाने की तिथि से लेकर जेल से रिहा होने के छह साल बाद तक लागू रहता है।

ऐसे हुआ मामले का खुलासा
जेबीटी भर्ती घोटाले को अंजाम देने के लिए वर्ष 1985 बैच के आईएएस अधिकारी संजीव कुमार को शिक्षा विभाग का निदेशक बनाया गया था। मामले के मुताबिक परीक्षा के बाद योग्य उम्मीदवारों की जो सूची बनी उनमें संजीव कुमार के उम्मीदवार भी थे।

जब नतीजे घोषित करने की बारी आई तो अजय चौटाला व शेर सिंह बडशामी ने कुमार को धमकाते हुए उनके उम्मीदवारों के नाम सूची से काटकर नई सूची बनवाई और नतीजे घोषित करने को कहा। यहीं से घोटाले का खुलासा होना शुरू हो गया।

खुद को ठगा महसूस होने पर कुमार 2003 में सुप्रीम कोर्ट गए। उन्होंने याचिका दायर करके योग्य व अयोग्य उम्मीदवारों की दो सूचियां पेश कीं। सूत्रों के मुताबिक जब मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही थी तो कुमार के कार्यालय में आग लग गई और उसमें उम्मीदवारों की सूची सहित जेबीटी भर्ती का काफी रिकार्ड जल गया।
याचिका पर सुनवाई के बाद मामले की सीबीआई जांच का आदेश दिया गया। हालांकि मामले का खुलासा करने सुप्रीम कोर्ट गए संजीव कुमार सीबीआई जांच में खुद भी दोषी पाए गए।

इन धाराओं के तहत दोषी
अदालत ने सभी आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी (आपराधिक साजिश), 418 (छल करके हानि पहुंचाना), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति का फर्जीवाड़ा), 471 (फर्जी दस्तावेज का असली की तरह इस्तेमाल) और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की धारा 13(2) व 13(1)(डी) के तहत दोषी करार दिया है।

क्या है मामला
सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक 1999-2000 में 3206 जूनियर बेसिक ट्रेंड (जेबीटी) टीचर्स की नियुक्ति में ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। नियुक्तियों की दूसरी लिस्ट 18 जिलों की जिला स्तरीय चयन समिति के सदस्यों और अध्यक्षों को हरियाणा भवन और चंडीगढ़ के गेस्ट हाउस में बुलाकर तैयार कराई गई।

ये भी हैं दोषी
ओम प्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला के अलावा प्राथमिक शिक्षा के पूर्व निदेशक संजीव कुमार, चौटाला के पूर्व ओएसडी विद्या धर और हरियाणा के पूर्व सीएम के राजनीतिक सलाहकार शेर सिंह बादशामी को दोषी ठहराया गया है।

संजीव कुमार पर फोड़ा ठीकरा
ओम प्रकाश चौटाला के छोटे बेटे अभय चौटाला ने कोर्ट के फैसले के बाद अपने पिता और भाई को पाक साफ करार दिया। अभय ने घोटाले का पूरा ठीकरा आईएएस अधिकारी संजीव कुमार पर फोड़ते हुए कहा कि यह सब उन्हीं किया धरा है और वह पहले भी कई घोटालों में लिप्त रहे हैं। उन्हें हरियाणा सरकार ने निलंबित भी किया था। अभय ने यह भी कहा कि जेबीटी टीचर्स की भर्तियों की प्रक्रिया तो चौटाला सरकार से पूर्व की सरकार में ही पूरी कर ली गई थी।


ओपी चौटाला के इशारे पर ही आरोपियों ने पूरे घोटाले को अंजाम दिया। चौटाला ने संजीव कुमार को प्राथमिक शिक्षा निदेशक नियुक्त करते हुए उनसे नियुक्तियों की पहले से तैयार सूची को बदलकर दूसरी सूची तैयार करने को कहा था। इसके पर्याप्त सुबूत हैं कि ओपी चौटाला ही इस घोटाले में सब कुछ तय कर रहे थे।--सीबीआई कोर्ट

--दोषी करार दिए गए 55 लोगों में 16 महिलाएं शामिल।
--22 जनवरी को सुनाई जाएगी सजा।
--62 आरोपी थे, छह की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हुई। एक को अदालत ने बरी किया।
--भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धाराओं में दोषी करार।

कानून अपना काम कर रहा है। कानून तोड़ने पर उसका नतीजा तो भुगतना ही होता है।--भूपेंद्र सिंह हुड्डा (हरियाणा के सीएम)

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed