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जयंती बोलीं, मोदी के खिलाफ मजबूर किया

Sat, 31 Jan 2015 08:41 AM IST
Updated Sat, 31 Jan 2015 08:41 AM IST
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Jayanthi Natarajan left Congress; Letter creates problems for Rahul Gandhi

पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंती नटराजन ने कांग्रेस छोड़ दी है। चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा देने का ऐलान किया।

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राहुल गांधी और सोनिया गांधी के रवैये से नाराज होकर उन्होंने ये फैसला लिया है। नटराजन ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनके लिए ये एक कठिन समय है। लेकिन कांग्रेस में अब लोकतंत्र नहीं रहा।
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नटराजन ने आगे कहा कि मेरा परिवार बहुत पहले से कांग्रेस से जुड़ा रहा है। हमारी नसों में कांग्रेस का खून है। परिवार की वो चौथी पीढ़ी हैं जो कांग्रेस में रही। 10 साल वो कांग्रेस की प्रवक्ता रही। उनकी नाराजगी हाल के समय में पार्टी में चल रही गतिविधियों से थी।
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राहुल गांधी के खिलाफ सोनिया को लिखी उनकी चिट्ठी के मीडिया में आने के बाद से ही ये कयास लग रहे थे कि नटराजन पार्टी छोड़ने के ऐलान कर सकती हैं।

राहुल गांधी पर साधा निशाना

Jayanthi Natarajan left Congress; Letter creates problems for Rahul Gandhi

चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने अपनी चिट्ठी में उठाए गए लगभग सभी सवालों को जवाब दिए।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण मंत्री के तौर पर उन्होंने कानून के मुताबिक फैसले लिए। मेरे लिए पर्यावरण को बचाना जरूरी था। सोनिया गांधी भी पर्यावरण रक्षा के पक्ष में थी। लेकिन राहुल के कार्यालय से उन्हें लगातार निर्देश मिलते थे।

नटराजन ने बताया कि वेदांता प्रोजेक्ट को उन्होंने ही रोका। वहीं अदाणी प्रोजेक्ट पर कांग्रेस उपाध्यक्ष कार्यालय राहुल गांधी के कार्यालय से निर्देश मिले। राहुल के कार्यालय से उनके खिलाफ गलत प्रचार किया गया।

कई प्रोजेक्ट राहुल गांधी के कहने पर उन्होंने रोके। नटराजन के मुताबिक कैबिनेट के साथियों ने भी उनकी आपत्तियों को नहीं सुना। कई मुद्दों पर कैबिनेट के लोग विरोध करते थे।

स्नूपगेट विवाद पर दी सफाई

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नटराजन ने बताया कि सोनिया गांधी ने उस समय इस मुद्दे को मीडिया में ले जाने से मना किया था। लेकिन अपना रूख साफ करना मेरी जिम्मेदारी थी।

नटराजन के मुताबिक उन्होंने कई बार कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने की कोशिश की। लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। यहां तक कि एंटनी कमेटी ने भी उनसे कोई बात नहीं की।

उन्होंने बताया कि वो स्नूपगेट के मुद्दे पर मोदी पर निशाना नहीं साधना चाहती थी। लेकिन माकन ने उन्हें जासूसी मुद्दे पर मोदी पर हमले के लिए कहा था। माकन ने ही उन्हें दिल्ली बुलाया। पार्टी के दबाव में मुझे टीवी पर स्नूपगेट के मुद्दे पर मोदी को निशाना बनाना पड़ा।

नटराजन के मुताबिक वो मोदी की नीतियों के चलते उन पर निशाना साधना चाहती थी। उन्होंने आगे बताया कि कांग्रेस में कई गलत तत्व सक्रिय हो गए हैं। मैं हमेशा से गांधी परिवार की वफादार रही हूं।

जयंती के निशाने पर राहुल

Jayanthi Natarajan left Congress; Letter creates problems for Rahul Gandhi

आपको बता दें कि कांग्रेस की पूर्व सांसद और यूपीए-2 सरकार में पर्यावरण मंत्री रही जयंती नटराजन ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर अब तक सबसे बड़ा हमला बोला। उनका एक पत्र मीडिया में आया, जिसमें उन्होंने राहुल गांधी पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए खुलासा किया था कि कांग्रेस उपाध्यक्ष उनके पर्यावरण मंत्री रहने के दौरान पर्यावरण मंत्रालय से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स पर अपने फैसले थोपते थे।

उन्होंने अपने पत्र में खुलासा किया था कि राहुल गांधी ने कई बार मंत्रालय को पत्र लिखकर अनुरोध भेजे। उनके ये पत्र किसी आदेश से कम नहीं थे। हालांकि जयंती नटराजन ने पत्र में ये भी कहा है कि दबाव के बाद भी उन्होंने राहुल के कई फैसलों को नहीं माना और योजनाओं को रोक के रखा।

ये खुलासे अंग्रेजी अखबार 'द हिंदू' में छपी जयंती नटराजन की उस चिट्ठी से हुआ है जो उन्होंने सोनिया गांधी को लिखे थे।

'मुझे बलि का बकरा बनाया गया'

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नवंबर में लिखी गई नटराजन की इस चिट्ठी में उन्होंने कहा था कि उनके खिलाफ दुष्प्रचार किया गया। इतना ही नहीं मीडिया में गलत खबरें चलवाकर उनके खिलाफ साजिश रची गई।

जयंती ने पत्र में ये भी आरोप लगाए कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया और जबरन पर्यावरण मंत्रालय से उनकी छुट्टी की गई। नटराजन के मुताबिक उन्हें पार्टी में काम करने का बहाना बनाकर मंत्रालय से हटाया गया।

नटराजन ने पत्र के जरिए इस बात के भी खुलासे किए थे कि राहुल गांधी ने यूपीए-2 सरकार में कई अहम फैसलों में दखलंदाजी की थी। मनमोहन सिंह की सरकार के कई फैसलों में राहुल सीधे तौर पर जुड़े होते थे। जिसको लेकर विपक्ष ने कई बार सवाल भी खड़े किए थे।

सोनिया को लिखी चिट्ठी में खुलासा

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सोनिया को लिखी चिट्ठी में जयंती नटराजन ने साफ किया था कि उनके खिलाफ पूरी साजिश रची गई। ये सब कुछ उस समय शुरू हुआ जब राहुल गांधी के फैसलों को उन्होंने मानने से मना कर दिया। उन पर कई प्रोजेक्ट अटकाने के भी आरोप लगाए गए।

उन्होंने अपनी बात की पुष्टि के लिए बताया कि जब उन्हें मंत्री पद से हटाया गया, उसके ठीक एक दिन बाद राहुल गांधी ने फिक्की के कार्यक्रम में व्यापारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि अब उन्हें किसी भी तरह की परेशानी नहीं होगी।

हालांकि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे जयंती नटराजन के इस पत्र का उन्हें कोई जवाब नहीं मिला था। इस बीच जयंती नटराजन के इतने बड़े खुलासे के बाद केंद्र की एनडीए सरकार भी सक्रिय हो गई है।

एक बार फिर से भाजपा को कांग्रेस पर निशाना साधने का मौका मिल गया। इस मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली सामने आए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार में जो भी पर्यावरण मंत्रालय से जुड़े फैसले लिए गए उनकी जांच की जाएगी। दूसरी ओर नटराजन के खुलासों ने कांग्रेस की मुश्किलें जरूर बढ़ा दी है।

दुनिया की सबसे बड़ी अवसरवादी हैं जयंती

Jayanthi Natarajan left Congress; Letter creates problems for Rahul Gandhi

प्रेस कान्फ्रेंस कर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर सनसनीखेज आरोप लगाने वाली जयंती नटराजन पर कांग्रेस पार्टी ने पलटवार किया है। पार्टी प्रवक्‍ता अभिषेक मनु सिंघवी ने जयंती के सभी आरोपों को नकारते हुए उन्हें दूनिया की सबसे बड़ी अवसरवादी कहा।

पार्टी की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता में सिंघवी ने कहा कि जयंती ने आरोप लगाया है कि उन्हें प्रवक्‍ता पद से हटाने के बाद कभी कारण नहीं बताया गया। सिंघवी के अनुसार आज जयंती जिनके इशारों पर पार्टी पर आरोप लगा रही हैं कभी उन्होंने ही जयंती टैक्स की बता कही थी। ऐसे में उन लोगों ने ही उन्हें हटाने का कारण साफ कर दिया।

सिंघवी ने कहा कि नियमगिरी के बारे में जयंती राहुल गांधी पर जो आरोप लगा रही हैं वह भी पूरी तरह तथ्य से परे हैं। राहुल गांधी नियमगिरी जयंती के मंत्री बनने से पहले गए ‌थे, ऐसे में उन पर दबाव बनाने का सवाल ही नहीं उठता।

बकौल सिंघवी चार बार बिना चुनाव लड़े सांसद रहने वाली जयंती को उस समय कभी कांग्रेस में लोकतंत्र की शिकायत नहीं हुई। वो मंत्री भी रहीं, पार्टी की प्रवक्‍ता भी रही और कई बड़े पदों पर भी रही फिर भी उन्हें पार्टी में लोकतंत्र की शिकायत है। यह दुनिया में अवसरवादिता का अकेला उदाहरण है।

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