क्या संसद में जया बच्चन के ये बोल भड़काऊ नहीं?
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पिछले सप्ताह समाजवादी पार्टी की सांसद जया बच्चन ने राज्यसभा में आगबबूला होकर कहा, 'उस आदमी को जेल से छोड़िए, We will deal with him. बयान 16 दिसंबर, 2012 के कुख्यात रेप आरोपी मुकेश कुमार के संदर्भ में दिया गया था। बहस बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री 'इंडियाज डॉटर' पर हो रही थी।
बहस के अगले दिन ही दिल्ली से लगभग दो हजार किलोमीटर दूर दीमापुर में हजारों की भीड़ ने जेल से एक रेप आरोपी को खींचकर बाहर निकाला और पीट-पीटकर मार डाला। बाद में उसकी लाश को शहर के चौराहे पर फांसी पर लटका दिया गया।
न्याय का यह तालिबानी तरीका मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए सामने आया तो हाहाकार मच गया। संविधान और न्यायिक प्रक्रिया की दुहाई दी जाने लगी, ताबड़तोड़ कार्रवाइ हुई और उस भीड़ के 18 भेड़ियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
लेकिन जया के बयान पर बात तक नहीं हुई। किसी ने पूछा भी नहीं कि जिस मंदिर में कानून बनता है, उस मंदिर में कानून तोड़ने की बात क्यों की गई?
डॉक्यूमेंट्री पर बहस कर रही थीं जया
पिछले हफ्ते बुधवार को राज्यसभा में बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री 'इंडियाज डॉटर' में निर्भया के रेप आरोपी मुकेश कुमार का साक्षात्कार लिए जाने पर हंगामा हुआ था। सांसदों ने मुकेश कुमार का साक्षात्कार लेने की इजाजत दिए जाने पर नाराजगी जताई थी।
राज्यसभा में बहस के लिए मसला जनता दल युनाइटेड के सांसद केसी त्यागी ने उठाया था। मामले पर हो रही बहस में समाजवादी पार्टी की सासंद जया बच्चन ने कहा कि रेप के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सरकार को ज्यादा वक्त क्यों चाहिए। इस मामले में पिछली सरकार का जो रुख रहा, मौजूदा सरकार का भी वही रुख है।
जया बयान के बीच जब अन्य सासंदों ने टीका-टिप्पणी की तो उन्होंने गुस्से से आग बबूला होकर कहा, 'उस आदमी को जेल से छोड़िए, We will deal with him। उल्लेखनीय है कि निर्भया के रेप के मामले में निचली अदालत ने मुकेश सिंह समेत चार दोषियों को फांसी की सजा दी है। मामला फिलहाल ऊपरी अदालतों से गुजर रहा है।
ऐेसे बयान के बाद कानून का सम्मान कौन करेगा
ये बात किसी से छिपी नहीं है भारत में न्यायिक प्रकिया बहुत ही धीमी है। रेप जैसे मामले को निपटाने के लिए फास्टट्रैक कोर्ट के गठन की मांगी कई बार हो चुकी है। निर्भया के मामले के बाद फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन भी किया गया, हालांकि उसके बाद भी न्यायिक प्रक्रिया में वैसी तेजी नहीं आई है, जैसी जनता की अपेक्षा है।
देश में न्याय की त्वरित उपलब्धता और और न्यायतंत्र को सुचारु बनाने की जिम्मेदारी संसद की ही है। कानून बनाने के जिम्मेदारी संसद की ही है, ऐसे में जया बच्चन के बयान को किस रूप में देखा जाए?
जिन्हें कानून बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, वही कानून तोड़ने की बात करते हैं या जिन्हें कानून बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें कानून की समझ ही नहीं। जिन्हें कानून की समझ नहीं उनसे मानवाधिकारों की अपेक्षा कैसे की जाए?
जया का बयान यहां सुनें-