फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   jawahar lal nehru vivechana

नेहरू के बारे में आपको पता नहीं होंगी ये बातें

Fri, 14 Nov 2014 01:01 PM IST
Updated Fri, 14 Nov 2014 01:01 PM IST
विज्ञापन
jawahar lal nehru vivechana

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू जितने हंसमुख थे, उतने ही गुस्सैल भी थे।

विज्ञापन


पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के आगमन पर दिल्ली हवाई अड्डे पर पत्रकारों की भीड पर वह इतना गुस्सा हुए कि गुलदस्ते से ही मारने दौड़ पडे़ थे।

नेहरू के बारे में ढेरों ऐसी बातें हैं जो उन्हें एक लोकप्रिय नेता, एक शौकीन मिजाज व्यक्ति, मितव्ययी और एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण वाले शख्स के रूप में चित्रित करती हैं।

आज उनकी 125वीं जयंती है।

पढ़ें रेहान फजल की विवेचना

अपने जमाने में नेहरू की गिनती दुनिया के पांच सर्वश्रेष्ठ अंग्रेजी लेखकों में होती थी। किसी अन्य शख्स के लिखे किसी कागज पर दस्तखत करना उनकी शान के खिलाफ होता था।
विज्ञापन


इसका नतीजा ये होता था कि नेहरू का अधिकतर समय चिट्ठियों को डिक्टेट करने या अपना भाषण तैयार करने में जाता था। नेहरू के सर्वश्रेष्ठ भाषण या तो बिना किसी तैयारी के अचानक दिए गए होते थे या उन्होंने उन्हें स्वयं तैयार किया होता था।
विज्ञापन
विज्ञापन


गाँधी की हत्या पर दिया गया उनका मशहूर भाषण (द लाइट हैज गॉन आउट ऑफ अवर लाइफ) लिखित भाषण नहीं था और उसी समय आकाशवाणी के स्टूडियो में बिना किसी तैयारी या नोट्स के उन्होंने संबोधित किया था।

बर्नाड शॉ से मुलाकात

jawahar lal nehru vivechana

नेहरू के सचिव एमओ मथाई अपनी किताब 'रेमिनेंसेस ऑफ नेहरू एज' में लिखते हैं कि जब नेहरू मशहूर लेखक जॉर्ज बर्नाड शॉ से मिलने गए थे तो बर्नाड शॉ ने उन्हें अपनी पुस्तक 'सिक्सटीन सेल्फ स्केचेज' पर अपना हस्ताक्षर कर भेंट की।

उन्होंने उस पर नेहरू का नाम जवाहर लाल की जगह जवाहरियल लिखा। मथाई ने तुरंत इस गलती की तरफ उनका ध्यान दिलाया। शॉ अपनी लाइब्रेरी में गए और नेहरू की आत्मकथा निकाल कर लाए। उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ, लेकिन शरारती अंदाज में बोले, ’इसको ऐसे ही रहने दो। इट साउंड्स बेटर।’

नेहरू ने उन्हें कुछ चौसा आम खाने के लिए दिए। शॉ ने पहली बार आम देखा था। वो समझे कि आम की गुठलियाँ खाई जाती हैं। नेहरू ने उन्हें आम काट कर दिखलाया और बताया कि कैसे आम का गूदा खाया जाता है।

‘कंजूस’ नेहरू

jawahar lal nehru vivechana

नेहरू अपने ऊपर बहुत कम पैसे खर्च करते थे। मथाई कहते हैं कि कुछ मामलों में तो उन्हें कंजूस कहा जा सकता था। लेकिन एक बार उन्होंने सेस ब्रूनर की गाँधी जी की गहन सोच की मुद्रा में बनाई गई पेंटिंग खरीदने के लिए पाँच हजार रुपए खर्च करने में एक सेकेंड का भी समय नहीं लिया।

उनके सुरक्षा अधिकारी के एफ रुस्तमजी लिखते हैं कि एक बार डिब्रूगढ की यात्रा के दौरान वो उनका सिगरेट केस लेने उनके कमरे में गए तो उन्होंने देखा कि उनका नौकर उनके फटे हुए काले मोजों को सिल रहा है। नेहरू को बर्बादी बहुत नापसंद थी।

कई बार वह कार रुकवाकर अपने ड्राइवर को भेजते थे कि वह बगीचे में चल रहा पानी का पाइप बंद करके आए। एक बार सऊदी अरब की यात्रा के दौरान उन्होंने रियाद के जगमगाते राजमहल के एक-एक कमरे में जाकर उसकी बत्ती बंद की।

555 सिगरेट के शौकीन

एक बार किसी ने रुस्तमजी से पूछा क्या नेहरू शराब पीते हैं। उनका जवाब था, कभी नहीं। हाँ उन्हें सिगरेट पीने की जरूर आदत थी। वो स्टेट एक्सप्रेस 555 पिया करते थे। पहले वो दिन भर में 20-25 सिगरेट पी जाते थे, लेकिन बाद में वो दिन भर में सिर्फ पाँच सिगरेट पिया करते थे।

नेहरू के समय में सभी विदेशी शासनाध्यक्ष या तो राष्ट्रपति भवन में ठहरा करते थे या नेहरू के निवास स्थान तीन मूर्ति भवन में। उस दौरान इन विदेशी अतिथियों के कमरों में विदेश मंत्रालय के तरफ से तरह-तरह की चुनिंदा शराब रखवा दी जाती थी और उन्हें सर्व करने के लिए एक अंग्रेजी बोलने वाला सेवक तैनात कर दिया जाता था।

लेकिन नेहरू द्वारा दिए गए किसी सरकारी भोज में कोई भी शराब कभी सर्व नहीं की जाती थी। एक बार जरूर 1955 की रूस यात्रा के दौरान उन्होंने वहाँ तैनात राजदूत केपीएस मेनन के कहने पर ख्रुशचेव को दिए गए भोज में शेरी और वाइन सर्व करने की इजाजत दी थी और तब भी ये शर्त रखी थी कि भोज में मौजूद कोई भी भारतीय उनका सेवन नहीं करेगा।

‘मौलाना’ नेहरू

jawahar lal nehru vivechana

सरदार पटेल नेहरू से तेरह साल बडे थे और गाँधी से सात साल छोटे थे। इंदर मल्होत्रा बताते हैं कि नेहरू और पटेल के घर आस-पास थे। नेहरू ने उन्हें कह रखा था कि जब भी कोई मंत्रणा करनी हो वो स्वयं उनके घर आएंगे। उन्हें उनके यहाँ आने की जहमत करने की जरूरत नहीं है।

वो हमेशा उनके यहाँ पैदल जाते थे। मौलाना आजाद जरा दूर रहते थे। इसलिए नेहरू उनके घर मोटर में बैठकर जाते थे और गपशप करते थे। टेलिफोन पर नेहरू की कर्ट्सी होती थी कि वह खुद अपने हाथ से मौलाना को फोन मिलाते थे।

एक दिन उन्होंने अपने निजी सचिव एमओ मथाई से कहा कि मौलाना साहब से फोन पर बात कराइए। जब मौलाना ने फोन लिया और नेहरू आए तो उनका पहला जुमला था, "जवाहर लाल तुम्हारी उंगलियों में दर्द हो गया है कि तुम दूसरे से फोन मिलवा रहे हो।" नेहरू मौलाना का आशय समझ गए और बोले आइंदा से ये गलती कभी नहीं होगी।

एक बार पटेल से किसी ने पूछा कि इस समय भारत में सबसे बडा राष्ट्रवादी मुस्लिम कौन है। सब सोच रहे थे कि पटेल मौलाना आजाद या रफी अहमद किदवई का नाम लेंगे, लेकिन पटेल का जवाब था, ‘मौलाना नेहरू।’

अविश्वासी नेहरू

jawahar lal nehru vivechana

नेहरू को अपने आप को अविश्वासी कहने में मजा आता था। उन्होंने कभी भी किसी मूर्ति के सामने सिर नहीं झुकाया, कभी कोई व्रत नहीं रखा और न ही किसी ज्योतिषी से सलाह ली। एक बार 1954 में कुंभ के दौरान लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें मनाने की कोशिश की कि मौनी अमावस्या पर वो गंगा में डुबकी लगाएं।

उन्होंने कहा कि भारत के करोडों लोग ऐसा करते हैं। नेहरू को उनकी भावना और गंगा का सम्मान करते हुए ऐसा करना चाहिए। नेहरू का जवाब था, "गंगा मेरे अस्तित्व का हिस्सा है। मेरे लिए ये इतिहास की नदी है, लेकिन फिर भी मैं इसमें कुंभ के दौरान नहीं नहाऊंगा। वैसे इसमें नहाना मुझे पसंद है, लेकिन कुंभ के दौरान हरगिज नहीं।"

गर्म ओवरकोट में मफलर

jawahar lal nehru vivechana

घाना के नेता क्वामे न्क्रूमा ने अपनी आत्मकथा में नेहरू के बारे में एक दिलचस्प किस्सा लिखा है। एक बार न्क्रूमा जाडे के मौसम में भारत की यात्रा पर आए। वह ट्रेन से उत्तर भारत की यात्रा पर निकल रहे थे कि अचानक प्रधानमंत्री नेहरू स्टेशन पर पहुंच गए।

वह अपने साइज से बडा एक ओवर कोट पहने हुए थे। उन्होंने न्क्रूमा से कहा, "ये कोट मेरे लिए बहुत बडा है, लेकिन आपके लिए बिल्कुल ठीक साइज का है। इसको पहन कर देखिए।" न्क्रूमा ने उस कोट को पहना और वो बिल्कुल उनके साइज का निकला।

जब ट्रेन चल पडी तो उन्होंने कोट की जेब में हाथ डाला। एक जेब में एक गर्म मफलर और दूसरी जेब में एक जोडी गर्म दस्ताने थे। अपने मेहमान के आराम के बारे में सिर्फ नेहरू ही इस तरह सोच सकते थे।

आगबबूला नेहरू

jawahar lal nehru vivechana

वैसे तो नेहरू बहुत हंसमुख थे, लेकिन जब कभी उन्हें गुस्सा आता था तो वो सभी हदें पार कर जाते थे।

उनके सुरक्षा अधिकारी रह चुके के एफ रुस्तम जी अपनी किताब 'आई वाज नेहरूज शैडो' में लिखते हैं कि 1953 में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मोहम्मद अली अपनी पत्नी के साथ दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरे तो उन्हें नेहरू के मशहूर गुस्से का नजारा अपनी आँखों से देखने का मौका मिला।

हुआ ये कि जैसे ही जहाज की सीढियाँ लगाई गईं, वहाँ मौजूद करीब पचास कैमरामैन मक्खियों की तरह जहाज के चारों तरफ खडे हो गए। जैसे ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री उतरे, पीछे खडी भीड भी आगे आ गई और धक्का मुक्की होने लगी। नेहरू का पारा चढा तो चढता ही चला गया।

उन्होंने गुस्से में चिल्लाते हुए कैमरामैन के पीछे दौडना शुरू कर दिया। किसी एक शख्स ने नेहरू के लिए कार का दरवाजा खोला। नेहरू ने गुस्से में वो दरवाजा बंद कर दिया और फूल के एक बडे बूके से लोगों की पिटाई करने दौडे। रुस्तम जी ने बहुत मुश्किल से उन्हें जीप पर सवार होने के लिए मनाया।

नाराज नेहरू और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री जीप पर राष्ट्रपति भवन गए और उनकी लंबी कार जीप के पीछे-पीछे बिना किसी सवारी के आई।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed