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हार्दिक पटेल के साथ मंच साझा नहीं करेंगे जाट, जानिए क्यों

Thu, 03 Sep 2015 12:32 PM IST
Updated Thu, 03 Sep 2015 12:32 PM IST
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jat will not support hardik patel for reservation

आरक्षण के लिए लाखों की भीड़ जुटाकर गुजरात और केंद्र सरकार की नींद उड़ा चुके पटेल समाज के युवा हीरो हार्दिक पटेल के साथ जाट समाज आरक्षण की लड़ाई में मंच साझा नहीं करेगा। हालांकि पटेल समाज के आरक्षण की मांग का समर्थन किया जाएगा।

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पटेल समाज के युवा नेता हार्दिक पटेल ने अपनी लड़ाई को धार देने के लिए पहले से ही आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे जाट और गुर्जर नेताओं के साथ बातचीत कर रणनीति बनाने का एलान किया था।
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जाट आरक्षण संघर्ष समितियों से जुड़े नेताओं ने भी न केवल पटेल समाज की आरक्षण की मांग का समर्थन किया था, बल्कि उनके लड़ाका हार्दिक पटेल की सराहना भी की थी।
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जाट आरक्षण संघर्ष समितियों के मंच से भी पटेल समाज की तर्ज पर बड़ा आंदोलन करके सरकार पर दबाव बनाने का एलान किया जा रहा है। अमर उजाला ने अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक और संयुक्त जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एचपी सिंह परिहार से बात की।

'जाट अपने दम पर लड़ता है लड़ाई'

jat will not support hardik patel for reservation

यशपाल मलिक ने कहा कि हम पटेल समाज के आरक्षण का प्रबल समर्थन करते हैं, लेकिन हार्दिक पटेल के साथ मंच साझा नहीं करेंगे। हम दोनों की लड़ाई में अंतर है। जाटों को 9 राज्यों में पहले से ही आरक्षण का लाभ मिल रहा है।

समाज की लड़ाई केंद्रीय सेवाओं में आरक्षण पाने की है, जो सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी है। एचपी सिंह परिहार ने कहा कि हार्दिक पटेल ने अपने समाज में आरक्षण पाने की जो अलख जगाई है, वह निसंदेह शानदार है।

जाट समाज आरक्षण की लड़ाई लड़ने वालों का समर्थक रहा है। हम उनके आंदोलन का समर्थन करते हैं। हम गुर्जर समाज को भी आरक्षण के पक्ष में हैं।

लेकिन जाट समाज के मंच पर हार्दिक पटेल या अन्य किसी बिरादरी के नेता को साझीदार नहीं किया जाएगा। जाट समाज अपनी लड़ाई अपने दम पर लड़ता आया है और आगे भी लड़ता रहेगा।

स्पष्ट नहीं, क्या चाहते हैं हार्दिक पटेल

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राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया चौधरी अजित सिंह ने कहा कि हार्दिक पटेल ने दिल्ली में बड़ी मीटिंग तो कर ली, लेकिन यह स्पष्ट नहीं कि वह आरक्षण लेना चाहते हैं या आरक्षण व्यवस्था को खत्म कराना चाहते हैं।

शामली स्थित विवेक विहार में रालोद नेता योगेंद्र चेयरमैन के आवास पर पत्रकारों से बातचीत में चौधरी अजित सिंह ने कहा कि रालोद पहले से ही जाट आरक्षण की मांग करता रहा है। सात राज्यों में आरक्षण मिला हुआ है, लेकिन केंद्र में भी आरक्षण की मांग की जा रही है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान मंच से भले ही आरक्षण की बात नहीं हुई, लेकिन यह मुद्दा लगातार उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केंद्र स्तर पर आरक्षण को लेकर ऊहापोह की स्थिति है।

यूपीए से हो चुके हैं अलग

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मंडल आयोग का सर्वे 1979 में हुआ था। आयोग की सिफारिश को पांच जजों की पीठ ने सही ठहराया था, उसे दो जजों की पीठ कैसे खारिज कर सकती है।

वहीं, रालोद मुखिया ने आगामी 2017 के विधानसभा चुनाव को लेकर किसी भी राजनीतिक दल से  गठबंधन करने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि रालोद अकेले ही चुनाव लड़ेगी।

पार्टी के भाजपा में विलय की चर्चा को उन्होंने अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह यूपीए से अलग हो चुके हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगे की वजह से दो समुदायों के लोगों में जो दूरियां बनी, उन्हें कम करने के लिए  रालोद सद्भावना कार्यक्रम चलाएगा। उन्होंने कहा कि दंगों की वजह से दोनों ही समुदायों को पीड़ा पहुंची और आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा, उससे लोगों ने सबक लिया है।

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