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जाट आरक्षण रद्द, सुप्रीम कोर्ट का फैसला

Tue, 17 Mar 2015 08:35 PM IST
Updated Tue, 17 Mar 2015 08:35 PM IST
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Jat reservation scrapped by Supreme Court.

जाट आरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए इसे रद्द करने का आदेश दिया है। सर्वोच्च अदालत के मुताबिक जाटों को आरक्षण की जरूरत नहीं है।

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे पर कहा कि आरक्षण की बुनियाद जाति नहीं होना चाहिए। कोर्ट के मुताबिक जाटों की आर्थिक स्थिति उतनी खराब नहीं है कि उनको आरक्षण का लाभ मिल जाए। कोर्ट ने कहा कि पिछड़ापन सामाजिक होना चाहिए, आर्थिक नहीं।
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हालांकि इस फैसले के बाद भी नौ राज्यों में स्थानीय नौकरियों में आरक्षण लागू रहेगा। बता दें कि ये आरक्षण यूपीए सरकार के दौरान लागू किया गया था। जिसे मोदी सरकार ने भी जारी रखा था।
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यूपीए सरकार ने लागू किया था आरक्षण

Jat reservation scrapped by Supreme Court.

यूपीए सरकार ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जाटों को पिछड़ी जातियों (ओबीसी) की केंद्रीय सूची में शामिल करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी थी। इस फ़ैसले से जाटों को केंद्र सरकार के तहत आने वाली नौकरियों में पिछड़े वर्ग की श्रेणी में फ़ायदा मिलना था।

कुल नौ राज्यों में रहने वाले जाट समुदाय के लोगों को इस श्रेणी में शामिल किया गया था। यह नौ राज्य हैं- उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड और राजस्थान (दो जिलों और धौलपुर को छोड़कर)

तभी यह आशंका जताई गई थी कि कि केंद्र सरकार के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दीजा सकती है। केंद्र सरकार ने पिछड़ा वर्ग आयोग के ताज़ा सर्वेक्षण का इंतज़ार किये बिना ही जाट आरक्षण को मंज़ूरी दे दी थी।

बता दें कि जाट समुदाय लंबे समय से ओबीसी आरक्षण की मांग करता रहा है। जिसके बाद यूपीए सरकार ने ये फैसला लिया था।

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