हरियाणा: अब गैर जाट बने भाजपा की मुसीबत
जाट आरक्षण आंदोलन के सियासी चक्रव्यूह में उलझी भाजपा की परेशानी हरियाणा इकाई ने बढ़ा दी है। जाट बिरादरी को आरक्षण के सवाल पर राज्य में विधायकों और मंत्रियों के दो फाड़ हो जाने के बाद अब राज्य के सांसद भी आमने सामने आ गए हैं।
आरक्षण का हल निकालने के लिए बनी उच्चस्तरीय समिति की ओर से बुधवार को बुलाई गई बैठक में गैर जाट और जाट सांसदों के बीच तीखी नोंकझोंक हुई।
बैठक समिति के अध्यक्ष केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू के आवास पर हुई। प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला और सांसद धर्मबीर सिंह ने इस दौरान सांसद राजकुमार सैनी के भाषण की वीडियो क्लिप दिखाई तथा कहा कि उन्हीं के भाषण के कारण आंदोलन हिंसक हो गया।
दूसरी ओर गैर जाट सांसद खुल कर सैनी के पक्ष में खड़े हो गए और राज्य सरकार के दो जाट मंत्रियों की बयानबाजी को हिंसा के लिए जिम्मेदार बताया। इन सांसदों ने साफ साफ कहा कि हिंसा, आगजनी और लूटपाट में जाट बिरादरी शामिल थे।
एक सांसद ने तो यहां तक कहा कि हिंसा के लिए सम्मानित करने के सरकार के रवैये से गैर जाट बिरादरी आंदोलित हो सकती है। बैठक में जाट सांसद जहां ओबीसी कोटे में आरक्षण की मांग पर डटे रहे, वहीं गैर जाट सांसदों ने साफ कर दिया कि ऐसा कोई भी निर्णय उन्हें स्वीकार नहीं होगा।
अब पार्टी के सांसद भी आए आमने-सामने
सूत्रों के मुताबिक इसी बीच केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने सर छोटू राम की प्रतिमा तोड़े जाने और पूरे राज्य में गैर जाट बिरादरी के लोगों की संपत्तियों की लूटपाट का हवाला देते हुए पूछा कि सरकार हिंसा करने वालों की बात तो कर रही है, मगर पीड़ितों की बात कब सुनी जाएगी।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के नाम पर एक वर्ग विशेष ने गुंडागर्दी की सारी हदें पार कर दी। ऐसे में इस वर्ग विशेष के पक्ष में खड़ा होने पर भाजपा को बड़ा सियासी नुकसान झेलना पड़ेगा।
सैनी बोले, बिरादरी की बात की है और करता रहूंगा
जाट सांसदों के निशाने पर चल रहे सांसद सैनी बैठक में हुई नोंकझोंक के दौरान भी अपने रुख पर कायम रहे। सैनी ने भड़काने वाला बयान देने से मना करते हुए कहा कि उन्होंने बिरादरी के हित की बात कही और कहते रहेंगे। बैठक के बाद नायडू ने अध्यक्ष सुभाष बराला के साथ सैनी से फिर बात की। उन्हें सार्वजनिक बयान न देने का निर्देश दिया गया है।