पीएम मोदी के साथ रहने पर पहली बार बोलीं जशोदाबेन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ लेने जा रहे हैं, तो उनकी पत्नी जशोदाबेन भी इस पल का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
मोदी की पत्नी होने पर गर्व महसूस करने वाली जशोदाबेन ने कहा भी कि अगर उन्हें शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित किया गया तो वे जरूर जाएंगी।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि मोदी उन्हें प्रधानमंत्री आवास सात रेसकोर्स रोड में रहने के लिए बुलाते हैं तो इसमें उन्हें कोई ऐतराज नहीं है। जशोदाबेन ने एक गुजराती चैनल को दिए इंटरव्यू में अपने मन की बातें जाहिर कीं।
दोनों के बीच नहीं हुआ तलाक
उन्होंने कहा कि मोदी के प्रधानमंत्री बनने पर उन्हें सबसे ज्यादा खुशी हुई है। उन्होंने कहा कि जब मोदी ने चुनाव में वडोदरा सीट से नामांकन भरते हुए पहली बार मेरा नाम पत्नी के तौर पर लिखा तो मुझे बेहद खुशी हुई थी क्योंकि आखिरकार इतने साल बाद उन्होंने मुझे अपनी पत्नी स्वीकार किया था।
उन्होंने बताया कि शादी और अलग होने के बाद वह केवल एक बार ही वर्ष 1987 में मोदी से मिली हैं। हालांकि उनके परिजनों से कभी कभार मुलाकात हो जाती है।
जशोदाबेन ने कहा कि हम दोनों भले ही अलग-अलग रहते हैं पर हम साथ हैं। हमारा तलाक नहीं हुआ है। शादी के बाद मैं जितने भी समय मोदी के साथ रही, उन्होंने हमेशा अच्छा व्यवहार किया और पढ़ाई जारी रखने के लिए मुझे प्रोत्साहित भी किया।
'मोदी ने देश सेवा में जीवन अर्पित किया'
जशोदाबेन मानती हैं कि मोदी ने अपनी जिंदगी देश सेवा में अर्पित कर दी है इसलिए उन्होंने व्यक्तिगत जीवन और संसार का त्याग किया। लेकिन अगर वह अब भी उन्हें अपने साथ रहने के लिए आमंत्रित करें तो वह ऐसा करने के लिए तैयार हैं।
यह पूछे जाने पर कि उन्होंने मोदी के प्रधानमंत्री बनने के लिए क्या मन्नतें मांगी थी, जशोदाबेन ने कहा कि यह निजी बातें हैं इसलिए वह इस पर कुछ नहीं कहेंगी।
जब उनसे पूछा गया कि वह फिर मोदी से मिलना चाहेंगी तो उनका जवाब था कि वक्त आने पर वह जरूर मिलने जाएंगी।
'मैं उनकी पत्नी हूं और हमेशा रहूंगी'
जब मोदी ने लोकसभा चुनाव में 9 अप्रैल को वडोदरा सीट से नामांकन भरते हुए पहली बार सार्वजनिक तौर पर मेरा नाम पत्नी के तौर पर लिखा तो मुझे बेहद खुशी हुई थी क्योंकि इतने साल बाद आखिरकार उन्होंने मुझे अपनी पत्नी स्वीकार किया था।
उन्होंने इतने साल बाद भी मुझे याद रखा। मैं उनका बेहद सम्मान करती हूं। मैं उनकी पत्नी हूं और हमेशा रहूंगी।
मोदी ने छोड़ दिया था घर
मोदी की जशोदाबेन से बचपन में ही सगाई हो गई थी और वर्ष 1968 में उनकी शादी हो गई। वे दोनों तब नाबालिग ही थे। कुछ ही समय बाद मोदी ने घर छोड़ दिया और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक बन गए।
जशोदाबेन भी उनसे अलग रह कर शिक्षिका के तौर पर अपने भाइयों के साथ जीवन बसर करती रहीं। उनका नाम इस साल अप्रैल में तब सुर्खियों में आया जब मोदी ने अपने नामांकन पत्र के पत्नी वाले कॉलम में उनका नाम लिखा।
इससे पहले वह इस कॉलम को रिक्त छोड़ दिया करते थे।