जनता परिवार में टूट से बीजेपी की बल्ले-बल्ले
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बिहार चुनाव के ठीक पहले जनता परिवार के टूटने का असर जदयू और राजद को नुकसान पहुंचाने से इरादे से भले किया गया हो मगर समाजवादी पार्टी का यह फैसला मुलायम सिंह यादव को भी भारी पड़ सकता है।
समाजवादी पार्टी के इस फैसले से मुलायम सिंह यादव पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर फायदा पहुंचाने का आक्षेप लग सकता है। लिहाजा, जनता परिवार के टूटने का असर बिहार से होकर उत्तर प्रदेश तक जाने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा रहा है।
मुलायम सिंह की मोदी सरकार से नजदीकियों की चर्चाओं की वजह से मुस्लिम वोट बैंक के छिटकने के संकट से भी पार्टी को दो चार होना पड़ सकता है। जनता परिवार से सपा के हटने से राजनीतिक सनसनी मचा दी हो। मगर वास्तव में जनता परिवार में विलय को लेकर सपा में शुरू से मतभेद थे। बिहार के सीट बंटवारे के विवाद ने सपा को इससे निकलने का मौका दे दिया।
बिहार में कम सीट देने की बात को समाजवादी पार्टी भले सबसे बड़ी वजह बता रही हो मगर पार्टी के अंदर इस बात की चर्चा है कि उत्तर प्रदेश के अपने सियासी गढ में जनता परिवार के किसी दूसरे नेता को जमीन देने के पक्ष में सपा सुप्रीमो का इरादा कभी नहीं रहा है।
यादव सिंह से रिश्तों बना फंसी सपा
भाजपा को सियासी झटका देने के लिए सपा को नीतीश और लालू यादव से हाथ मिलाना पड़ा था। मगर सीबीआई के पास नोएडा अथॉरिटी के इंजीनियर यादव सिंह का मामला जाने के बाद से केन्द्र सरकार से सपा की नजदीकियां एकाएक चर्चा में आ गई थी।
जुलाई-अगस्त में संसद के मानूसन सत्र में ललित गेट और व्यापमं घोटाले के मुद्दे पर एकजुट विपक्ष में सेंध लगाने की कोशिश की तो एक वक्त सपा ने कांग्रेस को इस मुद्दे पर अलग थलग कर दिया। उन्होंने कांग्रेस को हंगामा छोड़कर संसद चलाने की वकालत की थी।
तब उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी दलों के सामने समाजवादी पार्टी की खुलकर तारीफ की थी। मगर राजनीतिक जानकार अब सपा मुखिया के इस फैसले का सियासी नफा नुकसान निकालने लगे हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम वर्ग सपा के इस फैसले से असहज हो सकता है। अभी पिछले हफ्ते ही प्रधानमंत्री से मुलायम की मुलाकात और फिर उसके बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली से उनके भाई रामगोपाल यादव की मुलाकात के बाद ही सपा के इस फैसले से कयासों के बाजार गरम हो गए हैं।
जनता परिवार में बिखराव से भाजपा गदगद
बिहार विधानसभा चुनाव में कांटे की टक्कर में उलझी भाजपा जनता परिवार में बिखराव से गदगद है। सपा के जनता परिवार से दूरी बनाने की घोषणा के बाद पार्टी को जदयू-राजद गठबंधन की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने का बड़ा सियासी मौका हाथ लग गया है।
पार्टी ने कहा कि जनता परिवार की नींव रखने वाली सपा ही अब इससे बाहर आ गई है। ऐसे में यह सहज सवाल उठता है कि क्या इसके बाद राजद और जदयू के अलग-अलग होने की बारी है? पार्टी ने लगे हाथ यह भी दावा किया कि सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने चुनाव में जनता परिवार की तय हार के बाद होने वाली फजीहत से बचने केलिए समय रहते पार्टी के लिए नए राह चुन ली है।
पार्टी ने कहा कि संभवित मगर निश्चित हार की बौखलाहट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर साफ दिख रही है। स्थिति यहां तक आ पहुंची है कि नीतीश कुमार के डीएनए में अब लालू प्रसाद यादव का डीएनए नजर आ रहा है।
पार्टी ने दावा किया कि नीतीश की विश्वसनीयता उसी दिन खत्म हो गई थी, जिस दिन उन्होंने भाजपा को किसी भी कीमत पर हराने के अपने एजेंडे के तहत लालू प्रसाद से हाथ मिला लिया था।
बेमेल महागठबंधन का यही हाल होना था
चुनावी मुहाने पर सपा के यूटर्न से जदयू और राजद जहां सदमे में है, वहीं भाजपा जनता परिवार के बिखरने से उत्साह में है।
केंद्रीय मंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि भाजपा विरोध के नाम पर बने महागठबंधन के बिखरने की शुरुआत इससे एनसीपी के अलग होने के साथ ही हो गई थी।
फिर महागठबंधन की स्वाभिमान रैली के फ्लॉप शो के बाद भविष्य में हार के बाद होने वाली किरकिरी से खुद को बचाने के लिए जनता परिवार से अलग होने में ही अपनी भलाई समझी।
वरिष्ठ नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि इस बेमेल महागठबंधन का यही हाल होना था। सपा आज अलग हुई है, मगर अब सवाल यह है कि जदयू और राजद कब अलग होंगे।
शाहनवाज ने कहा कि दोनों दलों की नीयत, नीति, कार्यक्रम और सोच अलग-अलग हैं। ऐसे में इनका साथ बने रहना कठिन है।
अकेले चुनाव लड़ेगी समाजवादी पार्टी
बिहार में चुनाव से पहले ही राजद-जेडीयू के महागठबंधन को सपा ने बड़ा झटका दे दिया है। गठबंधन में कम सीटें मिलने से नाराज सपा ने अलग होते हुए अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
समाजवादी पार्टी के इस कदम से बिहार चुनाव में भाजपा गठबंधन की मुश्किल चुनौती से पार पाने के प्रयास में लगी लालू-नीतीश की जोड़ी को बड़ा झटका लगा है।
मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी बेशक राजनीतिक दल के रूप में बिहार में खास रसूख न रखती हो लेकिन यादव वोटरों पर मुलायम की मजबूत पकड़ से भी कोई इंकार नहीं कर सकता।
ऐसे में चुनाव से ऐन पहले सपा के महागठबंधन से अलग होने वाले नुकसान की भरपाई करना लालू नीतीश की जोड़ी के लिए आसान नहीं होगा।