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जनसत्याग्रह: बुखार से तपते बदन, पांव में छाले पर हौसला अडिग

Tue, 09 Oct 2012 12:17 PM IST
आगरा/ब्यूरो
आगरा/ब्यूरो Updated Tue, 09 Oct 2012 12:17 PM IST
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jansatygrahi farmers stern on spirit despite obstacles

किसी का बुखार से बदन तप रहा है तो किसी को मौसम और पानी का बदलाव नजले जुकाम का शिकार बना रहा है। कोई पैर के छालों से परेशान है तो किसी को लगातार चलने के कारण बना मांसपेशियों का खिंचाव और अकड़न परेशान किए है। इन सबसे बेहाल होने के बाद भी लोगों का जज्बा नहीं डिगा है। एक ही बात सभी ने ठानी है कि इस बार बगैर कुछ लिए घर वापस नहीं लौटेंगे।

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खैरादास जिला अशोक नगर मध्य प्रदेश का 70 वर्षीय पत्तू पिछले तीन दिन से बुखार से पीड़ित है। दवा लेकर कदम बढ़ाते हुए वह धौलपुर से सैंया तक पहुंच गया, लेकिन बुखार नहीं उतर रहा है। न ही पैदल चलने का उसका हौसला डिगा है। वह गाड़ी में आराम नहीं करना चाहता है और न ही घर वापस लौटना चाहता है। अब बुखार नहीं उतरने पर पैरामेडिकल टीम उसे इंजेक्शन लगवाने की बात कह रही थी। यह अकेले पत्तू की समस्यां नहीं है। इस यात्रा में उम्रदराज या बुजुर्गों की तादात काफी अधिक है, थकान, कमजोरी के कारण उन्हें चक्कर आ रहे हैं।
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दो दलों में बीमार लोगों को दवा देने का कार्य कर रही शबनम ने बताया कि हर ग्रुप में कम से कम 10 से 12 लोग बीमार हैं। उनमें बुखार, नजला-जुकाम की शिकायत अधिक है। विक्स या बाम उनके पास नहीं है। बदलता मौसम, पानी और थकान के कारण लोग बीमार हो रहे है, जिन्हें दवा से आराम नहीं होता उन्हें यात्रा के साथ चल रहे चिकित्सक परीक्षण के बाद इंजेक्शन लगाकर या दवा बदलकर ठीक कर रहे हैं। वह थकान के शिकार लोगों को एक मालिश करने वाली ट्यूब दे रही थी तो कुछ को दवा पिला रही थी।
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इस बार तो कलम धरवा लेंगे
ताज नगरी में पहुंचे सत्याग्रह में शामिल हजारों लोग इस बार छले जाने को तैयार नहीं है। उनका साफ कहना है कि इस बार ठोस निर्णय के बाद ही वापस लौटेंगे। यात्रा में शामिल अधिकांश लोग ऐसे हैं, जो दो अक्तूबर को ग्वालियर में हुई सभा में शामिल होने पहुंचे थे। वहां से दिल्ली कूच का आह्वान हुआ तो घर नहीं गए, वहीं से सीधे दिल्ली के रास्ते पर चल दिए।

ग्वालियर की तहसील बितरवा से आए रामजी लाल का कहना है कि वह 2007 में दिल्ली मार्च में गए थे और तब झूठा आश्वासन देकर उनके साथ छल किया गया था। इस बार ऐसा नहीं होने देंगे। डाबरा ग्वालियर की सरजूबाई कहती हैं कि हमारे पास घर या मढैया की सुविधा नहीं है। एक टाइम खाना खाकर चल रहे हैं। मर जाएंगे पर धोखा नहीं खाएंगे। तभी रामजी लाल फिर से बोल उठते हैं कि इस बार तो उससे (मंत्री जयराम रमेश) कलम धरवा लेंगे।

ताश खेल रहे सोपोर विजयपुर के अदिवासी गुदई का कहना है कि यदि उन्हें मांगने से जमीन नहीं मिली तो जबरन जमीन जोत लेंगे। राम सैन से आए देवी सिंह घर से ग्वालियर रैली में शामिल होने के लिए आए थे, वहां से दिल्ली मार्च का ऐलान हुआ तो वह भी चल पड़े। उनका कहना है कि उनके बच्चों को नहीं पता है कि वह दिल्ली जा रहे हैं। गरीब हैं, दूर जंगल में घर है, कैसे सूचना करते।


अधिकांश लोगों के साथ यही स्थिति है, उनके घर नहीं पता कि वह दिल्ली कूच पर निकल पड़े हैं। निर्णायक लड़ाई के लिए तैयारी करके यह लोग यहां तक पहुंचे हैं। इनका कहना है कि ग्वालियर में भी केंद्र सरकार के मंत्री ने उनके साथ धोखा किया।

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