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अरुण जेटली का बजट बोला, ‘हर-हर गंगे’

Fri, 11 Jul 2014 06:14 PM IST
Updated Fri, 11 Jul 2014 06:14 PM IST
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jaitley focused at ganga river in general budget 2014

‘मुझे तो मां गंगा ने बुलाया है’, वाराणसी की धरती पर उतरते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले शब्द यही थे। अब मोदी सरकार पतित पावन गंगा को वापस मां गंगा का रूप दिलाने के लिए अपना वादा भी निभाने जा रही है।

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लोकसभा में वित्त मंत्री अरुण जेटली का पहला बजट सही मायनों में 'हर हर गंगे' कह रहा था और प्रधानमंत्री समेत सभी भाजपा सांसद मेजों पर थपथपाहट के साथ इसमें डुबकी लगा रहे थे।
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बजट में 2037 करोड़ रुपए की 'नमामि गंगे' नाम की गंगा संरक्षण की योजना वित्त मंत्री ने राष्ट्रवासियों को समर्पित की तो गंगा और अन्य नदियों के किनारे स्थित घाटों के कायाकल्प का भी ऐलान किया है।

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गंगा पर बनेगा 1620 किलोमीटर लंबा जलमार्ग

jaitley focused at ganga river in general budget 2014

जेटली ने गंगा पर जल मार्ग तैयार करने की भी घोषणा की है। 1620 किलोमीटर की दूरी वाला यह अंतरदेशीय जलमार्ग इलाहाबाद से शुरू होगा और हल्दिया तक जाएगा। इसमें कम से कम 15 सौ पोतों का वाणिज्यिक नौवहन हो सकेगा।

4200 करोड़ रुपये की लागत वाली यह योजना छह सालों में पूरी की जाएगी। जेटली ने यह भी कहा कि गंगा के संरक्षण व सुधार पर भारी राशि खर्च हो चुकी है लेकिन समन्वित प्रयासों के अभाव में अपेक्षित परिणाम नहीं मिले।

बजट में गंगा पर घोषणाओं के साथ सरकार ने दिखा दिया वह देशवासियों की आस्था की प्रतीक इस नदी के लिए बहुत कुछ करने जा रही है। लोकसभा में जेटली के ठीक पीछे बैठीं उमा भारती के चेहरे पर उमड़ते खुशी के भाव यही कह रहे थे कि अब उनके करने के लिए काफी कुछ है।

बनेगा एनआरआई गंगा फंड

jaitley focused at ganga river in general budget 2014

गंगा के कायाकल्प को फंड जुटाने का सरकार ने तरीका भी ढूंढ लिया है। जेटली ने एनआरआई गंगा फंड की स्थापना की है। विदेश में बसे भारतीयों के जरिए इस कोष में फंड इकट्ठा किया जाएगा और गंगा की विशेष परियोजनाओं पर इन्हें खर्च किया जाएगा।

नदियों के उद्गम स्थल और इनके घाटों की महत्ता को देखते हुए जेटली ने बजट में नदियों के घाटों के कायाकल्प का ऐलान किया है। केदारनाथ से लेकर हरिद्वार, कानपुर, इलाहाबाद, वाराणसी, पटना में गंगा के घाटों तो दिल्ली के यमुना के घाटों को उनकी मान्यताओं के अनुरूप रंगरूप दिया जाएगा। इसके लिए सौ करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है।

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नदियों को जोड़ने के सपने को पूरा करने का भी बीड़ा उठाया गया है। इस संबंध में विस्तृत अध्ययन के लिए 100 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।

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