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चिदंबरम ने की धारा 377 पर पुनर्विचार की वकालत

Mon, 30 Nov 2015 01:18 PM IST
Updated Mon, 30 Nov 2015 01:18 PM IST
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jaitley and chidambaram says sc must review 377

अमूमन किसी एक मुद्दे पर हमारे राजनेताओं की बहुत कम मेल खाती है। लेकिन दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली और पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम की राय गे राइट्स पर मेल खा गई।

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दरअसल, टाइम्स लिटफेस्ट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि था कि समलैंगिकता के मुद्दे पर 2014 में दिए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट को पुनर्विचार करना चाहिए।
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जेटली के इस बयान के बाद कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम भी उनसे सहमत होते नजर आए। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला सराहनीय था और उसे सुप्रीम कोर्ट को जारी रखना चाहिए था औऱ सर्वोच्च न्यायालय को इसे जारी रखना चाहिए था।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने ठहाराया था जायज

jaitley and chidambaram says sc must review 377

बताते चले कि 2009 में दिल्ली हाईकोर्च ने अपने एक फैसले में दो वयस्कों के मध्य समलैंगिक संबंध को जायज ठहराया था।

वहीं इस फैसले के खिलाफ धार्मिक संगठनों ने 2013 में सर्वोच्च न्यायालय में अपील की थीय़। जिसके बाद न्यायालय ने समलैंगिक संबंधों को अपराध साबित करने वाली आईपीसी की धारका 377 को सही बताया था।

हालांकि इस मामले पर गे राइटस एक्टिवविस्ट्स ने 2014 में फैसले पर पुनर्विचार की याचिक दायर की थी लेकिन इसे खारिज कर दिया गया था।

सीपीएम और आप भी साथ!

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वही इसी मुद्दे पर सीपीएम नेता सीता राम येचुरी ने कहा कि जेटली को इस मुद्दे पर अपनी पार्टी को मनाना होगा। उन्होंने कहा की सीपीएम ही पहली और अकेली पार्टी थी जो धारा 377 के पक्ष में थी।

उन्होंने कहा कि भाजपा को इस मुद्दे पर बहस करने से पहले एकमत होना पड़ेगा। वहीं सूत्रों की माने तो दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार का भी इस मुद्दे पर कहना है कि इस धारा को भंग करना सकारात्मक माना जाएगा वहीं सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद पार्टी की तरफ से बयान आया था कि वे इस फैसले से निराश हैं।

पार्टी का कहना था कि यह न केवल मानवाधिकारों का उल्लंघन करता है बल्कि यह संविधान के भी उदार संविधान के विरोध में भी जा रहा है।

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