शपथ समारोह में लगे जय श्री राम के नारे
घने बादलों से बने खुशनुमा माहौल के बीच राज्यपाल कल्याण सिंह के शपथ ग्रहण समारोह में बृहस्पतिवार को एकाएक जय श्रीराम के जमकर नारे लगे। राजस्थान में राज्यपाल के शपथ ग्रहण समारोह में ऐसा वाकया पहली बार हुआ था।
हालांकि समारोह के बाद सिंह ने कहा कि जिसकी जिसमें श्रद्धा है, वह वही बोलेगा। इसमें कोई गुनाह तो नहीं है। श्रद्धा और विश्वास का सवाल है, जिस पर कोई पाबंदी नहीं लगाई जा सकती।
शपथ ग्रहण समारोह के बाद कल्याण सिंह ने पत्रकारों से कहा कि वे 60 वर्ष तक भाजपा में सक्रिय भागीदारी निभाने के बाद अब जीवन की नई पारी की शुरूआत कर रहे हैं। वे प्रदेश में प्रतियोगी नहीं, बल्कि सहयोगी बनकर आए हैं। उन्होंने कहा कि वे राज्यपाल पद की संवैधानिक गरिमा समझते हैं और इसके अनुरूप ही कार्य करेंगे।
कल्याण सिंह ने विजया राजे सिंधिया से अपने सम्बंधों के बारे में जिक्र किया और कहा कि यहां आकर ऐसा लग रहा है कि बड़ा भाई अपनी छोटी बहन के यहां आया है। उन्होंने कहा कि वे जनता दरबार नहीं लगाएंगे, ये राज्य सरकारों का काम है।
महामहिम नहीं माननीय कहलाना पसंद करेंगे
केरल में पूर्व मुख्य न्यायाधीश पी.सदाशिवम की नियुक्ति पर कांग्रेस के विरोध के सवाल पर कल्याण सिंह ने कहा कि कांग्रेस बाल की खाल निकाल रही है। यह पद पी. सदाशिवम को कोई इनाम के तौर पर नहीं बल्कि योग्यता के आधार पर दिया गया है। इसमें गलत क्या है? कांग्रेस के पास हार के बाद कोई काम नहीं बचा है।
कल्याण सिंह ने कहा कि वे महामहिम बुलवाना कतई पसंद नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें महामहिम शब्द में अलग प्रकार की गंध आती है। इसलिए वे भी राम नाईक की तरह खुद को माननीय कहलवाना पसंद करेंगे।
भाजपा की बड़ी जीत के बाद बड़े नेताओं को दरकिनार करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि ऐसा कतई नहीं है। सिंह ने माना कि उन्हें राज्यपाल बनाकर सम्मान दिया गया है। राज्यपाल बनना तो सम्मान की बात है।
जय श्री राम के नारे लगाने पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि भले ही कल्याण सिंह ने कहा हो कि यह लोगों की निजी आस्था का विषय है। पर हमें लगता है कि उस कार्यक्रम में एक पार्टी विशेष के लोग ही उपस्थित थे।