'बिहार में न हारते तो विपक्ष से हाथ नहीं मिलाते मोदी'
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बिहार चुनाव में हार के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष की ओर मित्रता का हाथ बढ़ाया है। अगर भाजपा बिहार में विजयी रही होती तो मोदी कतई विपक्ष से हाथ नहीं मिलाते। ये बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रबल समर्थक मशहूर अर्थशास्त्री जगदीश भगवती ने कही है।
भगवती नरेंद्र मोदी की नीतियों के पुराने पैरोकार हैं और लोकसभा चुनावों से पहले उन्हें प्रधानमंत्री बनाने की वकालत करते रहे हैं।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगड़िया को भगवती का करीबी माना जाता है। उल्लेखनीय है कि पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीएसटी बिल पर चर्चा करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को आमंत्रित किया था। माना जा रहा है कि किसी नीतिगत चर्चा के लिए प्रधानमंत्री ने 18 महीनों में पहली बार कांग्रेस के ओला नेताओं से व्यक्तिगत स्तर पर मुलाकात की।
मोदी सरकार के वरिष्ठ मंत्री अरुण जेटली भी जीएसटी बिल के मसले पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा नेताओं के व्यवहार में आए बदलाव को बिहार चुनावों में हार का नतीजा माना जा रहा है।
भगवती ने कहा, बहुत दिनों तक अड़ियल नहीं रह सकता विपक्ष
जगदीश भगवती ने इकोनॉमिक्स टाइम्स से हुई बातचीत में भी माना है कि मोदी बिहार चुनावों के बाद समझौतावादी हुए।
भगवती ने कहा कि मोदी अपेन पुराने एजेंडे पर बने रह सकते थे। वे अध्यादेशों से बदलाव करते और विपक्ष को अनदेखा कर देते, हालांकि बिहार की हार के बाद उन्होंने संभवतः अपना मन बदल दिया।
भगवती के मुताबिक, मोदी उसके बाद शायद ये तय किया विपक्ष से हाथ मिलाना बेहतर रणनीति होगी, बजाय कि एक्जक्यूटिव की रास्ता अपनाया जाए। भगवती ने ने ये भी कहा कि जीएसटी बिल पर विपक्ष बहुत दिनों तक अड़ियल रुख नहीं अपना सकता। कुछ एक मुद्दों पर मतभेद है और वे जल्द तय हो जाएंगे। मोदी सरकार सुधारों की ओर बढ़ेगी।