जाट आरक्षण पर सरकार की 'हां', आंदोलन खत्म करने की अपील
हरियाणा में हिंसक हो चले आरक्षण आंदोलन को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार और भाजपा ने जाटों को आरक्षण देने पर हामी भर दी है। इसके लिए राज्य विधानसभा में भावी सत्र में प्रस्ताव पारित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त केंद्रीय स्तर पर आरक्षण देने के लिए वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय कमेटी भी बनाने की घोषणा की गई है।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह के साथ जाट और खाप पंचायतों के नेताओं की बैठक के बाद भाजपा महासचिव अनिल जैन ने इस आशय की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार जाट बिरादरी को आरक्षण दिए जाने के पक्ष में है। ऐसे में अब इस बिरादरी को आंदोलन खत्म कर अपने अपने घरों में लौट जाना चाहिए।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी आशय का आरक्षण खुद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर आंदोलनकारियों को दे चुके हैं। इससे पहले गृह मंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, सेना प्रमुख और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के साथ उच्च स्तरीय बैठक के जरिए हरियाणा के हालात की समीक्षा की।
गौरतलब है कि बीते 5 दिन से जारी आरक्षण आंदोलन के हिंसक रूप ले लेने के बाद 10 लोगों की मौत हो गई है। हालात संभालने के लिए अर्द्घसैनिक बलों के बाद सेना को मोर्चे पर लगाया गया है। आंदोलन के कारण रेल और सड़क यातायात ठप है, जबकि दिल्ली की पानी की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हो गई है।
प्रदर्शनकारियों से आंदेलन वापस लेने की अपील
जाट आरक्षण आंदोलन से निपटने में जुटी केंद्र सरकार और भाजपा ने इस बिरादरी को ओबीसी कोटे में आरक्षण देने की घोषणा की है। जैन ने कहा कि हरियाणा विधानसभा में इस आशय का प्रस्ताव पारित होगा। इसके अलावा केंद्रीय मंत्रियों वाली एक उच्च स्तरीय समिति का भी गठन किया जाएगा।
जैन ने प्रदर्शनकारियों से आंदोलन खत्म करने की अपील की और कहा कि पार्टी के साथ-साथ सरकार हमेशा से जाटों को आरक्षण देने की पक्षधर रही है।
बैठक में मौजूद केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि जाटों को हरियाणा में ओबीसी कोटे में ही आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। जबकि केंद्रीय स्तर पर आरक्षण का लाभ देने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी घोषणा करेगी कि इस मामले को कौन देखेगा।
गौरतलब है कि पिछली यूपीए सरकार ने लोकसभा चुनाव से पूर्व बिना ठोस प्रक्रिया के लिए जाटों को केंद्रीय स्तर पर आरक्षण देने की व्यवस्था कर दी थी।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले को यह कह कर खारिज कर दिया कि यह समुदाय आरक्षण केलिए जरूरी आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन की शर्त को पूरा नहीं करती। इस फैसले के बाद राज्य के हाईकोर्ट ने भी हरियाणा में जाटों को दिए जा रहे आरक्षण पर रोक लगा दी थी।