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जाट आंदोलन में BJP को सता रहा एक बड़ा खतरा

Fri, 19 Feb 2016 06:18 PM IST
Updated Fri, 19 Feb 2016 06:18 PM IST
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Jat Arakshan issue,

हरियाणा में आरक्षण के लिए जाट बिरादरी के आंदोलन पर राज्य की खट्टर सरकार असमंजस में है, वहीं पार्टी नेतृत्व को इस बात की चिंता सता रही है कि इसकी चिंगारी प्रदेश से सटे उत्तर प्रदेश के इलाकों तक न पहुंच जाए। इस मामले में पार्टी और सरकार को बड़े कद के जाट नेताओं की बेहद कमी खल रही है।

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सरकार की ओर से इस बिरादरी को मनाने के लिए मोर्चे पर उतारे गए केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान, राज्य सरकार में मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के बाद वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु अब तक सफल होते नहीं दिख रहे हैं।
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भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बालियान को बुलाकर लंबी मंत्रणा की है, वहीं बालियान ने देर शाम में वित्त मंत्री अरुण जेटली से भी मुलाकात की। बालियान ने अमर उजाला को बताया कि आलाकमान जाट आरक्षण के पक्ष में है। बातचीत सकारात्मक है, अगले एक-दो दिनों में कुछ अच्छे संकेत मिलेंगे। लेकिन, मुश्किल यह है कि वह इस बिरादरी को आरक्षण देने संबंधी प्रस्ताव विधानसभा में पारित कर गैर जाट बिरादरी को नाराज नहीं कर सकती।
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राज्य सरकार छुड़ाना चाहती है अपना पीछा

Jat Arakshan issue,

पार्टी के ही सांसद राजकुमार सैनी पहले से ही जाट आरक्षण के खिलाफ न केवल मोर्चा खोले हुए हैं, बल्कि उन्होंने पिछड़ा वर्ग को सड़क पर उतारने की धमकी भी दी है।

राज्य भाजपा के एक नेता के अनुसार बालियान को बृहस्पतिवार को हरियाणा जाना था। लेकिन उन्होंने प्रदेश नेताओं को दो टूक कह दिया कि वे बिना किसी ठोस आश्वासन के जाट नेताओं के समक्ष नहीं जाएंगे। इस मामले में उन्होंने शाह के साथ करीब एक घंटे तक चर्चा की।

गौरतलब है कि आंदोलन की शुरुआत में भाजपा नेतृत्व ने आंदोलनकारियों को समझाने के लिए जाट बिरादरी के केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री संजीव बालियान को मोर्चे पर लगाया। बालियान से बात नहीं बनने पर इस मोर्चे पर राज्य सरकार के मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और अंत में कैप्टन अभिमन्यु को मैदान में उतारा।

जाटों को मनाने के लिए आर्थिक आधार पर आरक्षण का प्रस्ताव दिया गया, मगर आंदोलनकारियों ने इस आशय का प्रस्ताव विधानसभा से पारित कराने की मांग रख दी। राज्य सरकार इस विवाद को केंद्र के हवाले कर अपना पीछा छुड़ाना चाहती है।

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