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हेलीकॉप्टर डील: भारत को दस्तावेज नहीं देगा इटली
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 16 Feb 2013 08:30 PM IST
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इटली की अदालत ने भारत को अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में हुई घूसखोरी से संबंधित जानकारी देने से एक बार फिर इनकार कर दिया है। सरकार के लिए यह बड़ा झटका है। बजट सत्र उसके सामने खड़ा है और विपक्ष लगातार इस मामले में पूरे खुलासे की मांग का दबाव बनाए हुए हैं। फिर इस साल पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और अगला लोकसभा चुनाव भी बहुत दूर नहीं है।
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ऐसे में राजनीतिक तौर पर तोहमत को धोने में जुटी संकट से उबरने के लिए सीबीआई के साथ रक्षा मंत्रालय के विशेष प्रतिनिधियों को इटली भेज रही है। सीबीआई की दो सदस्यीय टीम रविवार को इटली रवाना होगी। टीम इटली के न्यायिक अधिकारियों से मिल कर जल्द मामले से जुड़ी पुख्ता तकनीकी जानकारी और जरूरी कागजात हासिल का प्रयास करेगी। पुख्ता जानकारियों के अभाव में सीबीआई एफआईआर नहीं दर्ज कर पा रही है।
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शनिवार को इटली की एक अदालत ने भारतीय दूतावास की अर्जी ठुकराते हुए कहा कि चूंकि अदालत में यह मामला शुरुआती स्तर पर है इसलिए इटली के कानून के मुताबिक पूरी जानकारी गुप्त रखी जा रही है। इसे नहीं दिया जा सकता।
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भारतीय दूतावास ने 13 फरवरी को इस अदालत से हेलीकॉप्टर कंपनी फिनमेकानिका के प्रमुख गियूसेप्पी ओरसी की गिरफ्तारी के जुड़े कागजात और इस डील में करीब 362 करोड़ की दलाली संबंधी तकनीकी जानकारी देने की अर्जी दी थी। अदालत का कहना है कि मुकदमा आगे बढ़ने के साथ जब यह जानकारी गुप्त श्रेणी से बाहर आ जाएगी तब भारत अर्जी दे सकता है। लेकिन 21 मार्च को शुरू होने वाले बजट सत्र ने सरकार की चिंता बढ़ा रखी है।
सीबीआई ने इंटरपोल से मदद मांगी
भारतीय दूतावास की अर्जी पर आस लगाए सीबीआई ने इटली की अदालत के इनकार से लगे झटके के बाद इंटरपोल का दरवाजा खटखटाया। लेकिन औपचारिक एफआईआर दर्ज नहीं होने की वजह से इंटरपोल ने भी फिलहाल हाथ खड़े कर दिए हैं।
इससे पहले रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों से अनौपचारिक पूछताछ में भी एजेंसी को ऐसी कोई जानकारी नहीं हाथ लगी जिसके आधार पर केस दर्ज किया जा सके। इसी मामले में तेजी लाने के मकसद से सीबीआई के एक डीआईजी और न्यायिक अधिकारी और रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी को इटली भेजने का फैसला किया है।