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1 जुलाई को ये रिपोर्ट खड़ा करेगी नया हंगामा

Sat, 28 Jun 2014 08:02 AM IST
Updated Sat, 28 Jun 2014 08:02 AM IST
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It report will raise a ruckus on July 1

देश की गरीबी पर रंगराजन समिति की रिपोर्ट 1 जुलाई को पेश की जाएगी। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री सी. रंगराजन के नेतृत्व में आर्थिक विशेषज्ञों की इस समिति का गठन देश में गरीबों की वास्तविक संख्या का निर्धारण करने वाली पद्धति की समीक्षा करने के लिए किया गया था।

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समिति की रिपोर्ट के बाद देश में गरीबों की वास्तविक संख्या पर अटकलबाजी समाप्त होने की उम्मीद है। योजना आयोग ने मई, 2012 में रंगराजन के नेतृत्व में इस विशेषज्ञ समिति का गठन कर उससे गरीबों का आकलन करने वाली तेंदुलकर कमेटी की पद्धति की समीक्षा करने को कहा था।

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सच बहुत ही कड़वा है

It report will raise a ruckus on July 1

तेंदुलकर कमेटी की गरीबी पर रिपोर्ट को लेकर काफी शोर शराबा हुआ था। जिसके मद्देनजर सरकार ने यह कदम उठाया था। तेंदुलकर कमेटी की पद्धति पर विचार करने के लिए ज्यादा समय लगने पर पूछे गए एक सवाल पर रंगराजन ने कहा था कि, ‘मुझे विचार के लिए और समय नहीं चाहिए।

समिति के विशेषज्ञ समिति के गठन के 7-8 माह के अंदर अपनी रिपोर्ट पेश कर देंगे।’ हालांकि रिपोर्ट पेश करने की अवधि में कई बार बढ़ोतरी की गई है। अब इसकी अंतिम समय सीमा 30 जून निर्धारित की गई है।

शहरी इलाके में प्रति व्यक्ति 32 रुपए कमाता

It report will raise a ruckus on July 1

सितंबर, 2011 में योजना आयोग के गरीबी के आकलन पर विवाद हुआ था। उस समय योजना आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में पेश अपने एक हलफनामा में कहा था कि शहरी इलाके में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 32 रुपये से अधिक और ग्रामीण इलाकों में प्रति व्यक्ति प्रति दिन 26 रुपये से अधिक की खपत क्षमता वाले व्यक्ति को गरीब नहीं माना जाएगा।

ऐसे आकलन के विरोध के बाद योजना मंत्री अश्वनी कुमार ने गरीबों के आकलन की पद्धति की समीक्षा करने पर जोर दिया था। उन्होंने कहा था कि लोगों का गरीबी पर अनुमान बदल गया है।

अब हमें गरीबों के आकलन की पद्धति पर नए सिरे से कार्य करना होगा। गौरतलब है कि तेंदुलकर पद्धति के आधार पर योजना आयोग ने पिछले साल जुलाई में गरीबी पर अपना आकलन पेश किया था। जिसमें 2004-05 के 37.2 फीसदी के मुकाबले 2011-12 में देश में गरीबों की संख्या प्रति व्यक्ति खपत में बढ़ोतरी के मद्देनजर 21.9 फीसदी बताई गई थी।

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