आ गया है सोना खरीदने का मौका, जान लीजिए वजह
बहुमूल्य धातु सोना अपनी चमक खो बैठा है। इसके दाम हैं कि गिरते जा रहे हैं। जुलाई महीना इसके लिए बहुत ही निराशाजनक रहा। इस महीने यह गिरकर एक समय पांच साल के न्यूनतम स्तर पर जा पहुंचा।
2010 के मार्च में सोना अंतरराष्ट्रीय बाजार में 1,102.9 डॉलर प्रति औंस था और इस महीने के तीसरे हफ्ते में भी यही हुआ। अकेले जुलाई महीने के एक पखवाड़े में इसके दाम में 5.8 प्रतिशत की कमी आई।
इस अभूतपूर्व गिरावट से सोने के कारोबारी बड़ी तादाद में मैदान छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। सोने और तेल की गिरती हुई कीमतों से दुनिया भर के कमोडिटी बाजारों में बेचैनी का माहौल है और तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
लेकिन एक बात साफ है कि सोने के भविष्य के बारे में कोई आशाजनक बात सामने नहीं आ रही है। हर ओर निराशा का माहौल है। सोना जिन बुलंदियों पर गया था, वे अब तिरोहित हो गई हैं। सीधी-सी बात है कि विदेशी बाजारों में इसके भविष्य को लकर शंकाएं गहरा गई हैं।
सोने से बनाई निवेशकों ने दूरी
आखिर हुआ क्या कि भविष्य का निवेश मानी जाने वाली यह चीज अचानक निवेशकों के रडार से गायब हो गई? इसके पीछे सीधी-सी थ्योरी तो यही है कि उसकी मांग बेहद कम हो गई।
दरअसल सोने के दो ही बड़े खरीदार देश हैं, भारत और चीन। इन दोनों देशों में सोने की मांग बहुत गिर गई है। भारत सरकार ने बजट घाटे को नियंत्रित करने के लिए इसके आयात पर कई तरह की पाबंदियां लगाईं, जिसका असर यह हुआ कि सोने की खपत कम हो गई।
चीन में मंदी आने की आशंका से वहां के निवेशक और शौकिया खरीदार सोने से दूर हो गए। इससे मांग में काफी कमी आ गई। मंदी से जूझते यूरोप में सोने की मांग वैसे ही कम थी, वहां इसके खरीदार और दूर हो गए।
दरअसल सोने की सबसे बड़ी कमजोरी है कि वह शेयरों की तरह न तो लाभांश देता है और न बॉन्डों की तरह ब्याज। वह एक निष्क्रिय निवेश है, जो किसी तरह का रिटर्न नहीं देता। इस समय अमेरिकी अर्थव्यवस्था के उठने से डॉलर और वहां के शेयर बाजार मजबूत हुए हैं। सोना तो बुरे वक्त का साथी है और उसमें निवेश के पीछे मानसिकता भी यही रहती है।
अमेरिकी बाजार के उतार-चढ़ाव से सस्ता हुआ सोना
दुनिया में भारतीयों और कुछ हद तक चीनियों को छोड़कर कोई भी कौम ऐसी नहीं है, जो सोने के गहनों का इतना इस्तेमाल करती हो। हम भारतीय सोने के मोहपाश में सदियों से जकड़े हुए हैं और शायद आने वाली कई और सदियों तक जकड़े रहेंगे।
पर दुनिया ऐसे नहीं चलती। सोने के दाम दुनिया भर में गिर रहे हैं और इसका एक बड़ा कारण यह है कि अमेरिका का केंद्रीय बैंक जिसे फेडरल रिजर्व कहते हैं, दस साल के बाद ब्याज दरें बढ़ाने जा रहा है। इस साल ऐसा हो सकता है और इस कारण बड़े निवेशक अपनी कारोबारी रणनीति में बदलाव कर रहे हैं।
अमेरिकी मौद्रिक नीति में बदलाव की संभावना से दुनिया भर के कमोडिटी बाजारों में हलचल है। जहां तक सोने की बात है, तो कारोबारी इस पर पूरी तरह से यकीन नहीं कर पा रहे हैं। जब डॉलर महंगा होता है, तो कमोडिटी बाजार में गिरावट आती ही है और सोने के खरीदार इससे दूर हो जाते हैं। यह पुराना सिद्धांत है कि डॉलर की मजबूती से सोने में हमेशा गिरावट ही आती है। निवेशक तब सोने से दूर हो जाते हैं और उन माध्यमों में पैसे लगाते हैं, जो उन्हें तुरंत और ज्यादा मुनाफा दे।
भारत में घट रही है सोने की मांग
भारत में सोने की मांग इस समय कम है। इसके पीछे भी दो महत्वपूर्ण कारण हैं। पहला तो यह कि यहां लोगों ने पिछले कुछ वर्षों में काफी सोना खरीदा। उन्हें लगा कि यह एक बढ़िया निवेश है और इसमें काफी रिटर्न है।
भारत में सोने के साथ एक और दिलचस्प तथ्य जुड़ा हुआ है कि जब सोने की कीमतों में तेजी आती है, तो ग्राहक इस ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। अभी सोने की गिरावट की खबरें आ रही हैं, तो वे इसके और गिरने का इंतज़ार कर रहे हैं।
गिरावट का दूसरा बड़ा कारण यह है कि अभी शादी-ब्याह का मौसम नहीं है। यहां शादियों में सबसे बड़ी खरीदारी सोने की होती है। सोना भारतीयों महिलाओं के सौंदर्य-सजावट का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। गहनों के बिना यहां सजावट कभी पूरी नहीं होती।
सोना खरीदने का वक्त आ गया है!
यह सवाल उठाना लाजिमी होगा कि अब इन परिस्थितियों में सोना खरीदा जाए या नहीं? ध्यान रखना चाहिए कि सोना भविष्य की अनिश्चितता का मुकाबला करने के लिए भी खरीदा जाता है। इसलिए इससे दूर हो जाना भी बुद्धिमानी नहीं।
अपने पोर्टफोलियो में सोना जरूर रखना चाहिए। यह खरीदारी का बढ़िया वक्त है और कीमतें नीचे हैं। हो सकता है कि यह थोड़ा और नीचे जाए, लेकिन उसके बाद सोना ऊपर जाएगा ही।
दरअसल बाजार की बुनियादी हकीकत में कभी बहुत ज्यादा बदलाव नहीं होता। थोड़े समय तक ऐसा बन रह सकता है और फेडरल रिजर्व की घोषणा के बाद कुछ और गिरावट आ सकती है, पर सोने को अपने स्तर पर आने से रोका नहीं जा सकता।
सोना एक बार फिर उठेगा, क्योंकि यह एक व्यापारिक चक्र है, जिसमें जो ऊपर जाता है, वह नीचे भी आता है। इसलिए सोने की थोड़ी-थोड़ी खरीदारी करते रहना आगे के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। कुछ भी हो, सोने की चमक बहुत लंबे समय तक फीकी नहीं रह सकती।सोना खरीदने का वक्त आ गया है!