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'पुलिस नहीं, CBI से कराएं मुजफ्फरनगर दंगे की जांच'
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sat, 02 Nov 2013 01:48 AM IST
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मुजफ्फरनगर दंगा मामले में जाट सभा ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से सीबीआई जांच कराने की मांग की है।
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सभा ने दंगा प्रभावित जिलों में फसलों और ट्यूबवेलों को नष्ट किए जाने के एवज में मुआवजा दिलाए जाने की भी मांग सर्वोच्च अदालत से की है।
उनके मुताबिक राज्य सरकार की ओर से जाट समुदाय को नजरअंदाज किया जा रहा है। ऐसे में उन्हें पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है।
चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम् की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सभा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता केटीएस तुलसी ने कहा कि जाट युवकों की हत्याएं दंगे के दौरान हुई हैं। राज्य की पुलिस से सही जांच किए जाने की उम्मीद मेरे मुवक्किलों को नहीं है। ऐसी स्थिति में अदालत जाट समुदाय को न्याय दिलाने के लिए सीबीआई को मामले की जांच का निर्देश जारी करे।
पीठ ने सभा के आग्रह पर सहमति जताते हुए कहा कि इस मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं पर अदालत दिवाली के बाद सुनवाई करेगी। इस याचिका पर भी तभी सुनवाई की जाएगी।
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वहीं तुलसी ने दावा किया कि राज्य सरकार जाट समुदाय को मुआवजा देने में भेदभाव कर रही है। इस पर भी अदालत उचित आदेश जारी करे।
पीठ ने कहा कि 21 नवंबर को होने वाली सुनवाई में अदालत इस याचिका पर सुनवाई करेगी। याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार को फिर से गांवों में हथियारों की खोजबीन करने का आदेश दिया जाए, जिन गांवों से कथित तौर पर एके-47 समेत बड़ी तादाद में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया था।
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यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने दी थी चेतावनी
याद रहे कि बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मुजफ्फरनगर में बुधवार को हुई चार हत्याओं को लेकर चेतावनी दी थी। अदालत ने कहा था कि यदि किसी भी तरह का संदेह होगा तो जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र दल को जांच के लिए भेजा जाएगा। यह क्षेत्र विचार का मुद्दा है और यहां पर राहत कैंपों समेत अन्य जो खबरें आ रही हैं। वह बहुत ही गंभीर हैं। अब राज्य सरकार इस संबंध में अदालत को 21 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश करे।
हिंसा में 63 लोगों की मौत
गौरतलब है कि 14 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में राज्य सरकार ने दावा किया था कि सांप्रदायिक हिंसा के दौरान 63 लोगों की मौत मुजफ्फरनगर, शामली, मेरठ, बागपत और सहारनपुर में 27 अगस्त से 27 सितंबर के बीच हुई थी। सरकार की ओर से 61 पीड़ित परिवारों को मुआवजा मुहैया कराया जा चुका है, जबकि दो शव अभी भी पहचाने नहीं जा सके हैं।