'मुस्लिम महिलाओं को पूरा चेहरा ढंकना जरूरी नहीं'
पाकिस्तान की संवैधानिक इस्लामिक संस्था ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि इस्लामी कानूनों के तहत महिलाओं के लिए चेहरा, हाथ और पैर ढंकना अनिवार्य नहीं है।
काउंसिल ऑफ इस्लामिक आइडियोलॉजी (सीआईआई) ने सोमवार को मौलाना मोहम्मद खान शेरानी की अध्यक्षता में बैठक हुई। शेरानी जमीयत उलेमा ए इस्लाम फज्ल से ताल्लुक रखते हैं।
बैठक के बाद सीआईआई प्रमुख ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं के लिए चेहरा, हाथ, और पैर ढंकना अनिवार्य नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि नैतिकता का पालन करना बेहतर व अच्छा है और समाज में सचेत रवैया रखना चाहिए।
शरारत का नहीं बता पाए मतलब
शेरानी ने आगे कहा कि यदि किसी प्रकार की शरारत की धमकी हो तो पूरा चेहरा और शरीर ढंकना अनिवार्य है। हालांकि वह ‘शरारत’ की व्याख्या करने में असफल रहे।
बैठक में कट्टरपंथी जमात ए इस्लामी पार्टी की डॉ. सामिया राहील काजी भी शामिल हुईं। बुर्का पहने होने के बावजूद भी उन्होंने इस निर्णय का समर्थन किया।
माना जा रहा है कि सीआईआई के इस फैसले के बाद महिलाएं कम्प्यूटराइज्ड राष्ट्रीय पहचान पत्र बनवाने के लिए आगे आएंगी। राष्ट्रीय पहचान पत्र बनवाने के लिए बिना चेहरा ढंके फोटो खिंचवाना अनिवार्य है। रूढ़िवादी परिवारों ने इसका विरोध किया था।