इराक से लौटी जुड़वां बहनें बोलीं, हमारा पुनर्जन्म है
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हिंसा प्रभावित इराक से सकुशल लौटी नर्सों ने वहां के अपने भयावह अनुभव भी साझा किए। इराक के तिकरित में फंसी नर्सों ने पिछले कुछ दिन और रातें बेचैनी और खौफ के माहौल में गुजारीं।
46 नर्सों में से ऐसी दो जुड़वा बहनें भी थी, जिन्हें स्वदेश वापसी पुनर्जन्म के बराबर महसूस हो रही है।
जुड़वा बहनों सोना और वीना का कहना है कि गोलियों और बम धमाकों के चलते रातों की नींद हराम हो गई थी और अपने भविष्य को लेकर चिंता सताती रहती थी। उन्होंने कहा कि घर वापसी उनके लिए पुनर्जन्म के समान है।
'हमें पता नहीं था कि क्या होने वाला है'
कोट्टयम जिले के इत्तूमनूर की रहने वाली दोनों बहनों ने बताया कि हम सभी आधी रात को बम धमाकों और गोलियों की आवाज सुनकर चौंककर उठ बैठती थीं।
सोना ने बताया कि जब 3 जून को आतंकियों ने हम सभी से अस्पताल छोड़ने को कहा था तो हम सब तनाव में आ गए क्योंकि हमें पता नहीं था कि क्या होने वाला है।
आईएसआईएस आतंकियों ने जहां हमें ले जाकर रखा था, उस जगह का भी पता नहीं था। उनके पास बंदूकें, बम थे। दोनों ने बताया कि हम सभी गोलियों और बम धमाकों में घायलों का इलाज करते थे। अस्पताल परिसर के अंदर और बाहर अकसर धमाके होते रहते थे।