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सबसे भारी रॉकेट का प्रक्षेपण करेगा इसरो
एजेंसी/श्रीहरिकोटा
Updated Sun, 30 Nov 2014 01:30 PM IST
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अपने मानव अंतरिक्ष कार्यक्रम की दिशा में कदम बढ़ाते हुए भारत 15 से 20 दिसंबर के बीच स्थानीय सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से तकनीकी परीक्षण (क्रू मॉड्यूल रिकवरी एक्सपेरीमेंट) करेगा। साथ ही वह अपने नवीनतम भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी-मार्क3) के परिचालन संबंधी प्रदर्शन का अध्ययन भी करेगा।
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सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के निदेशक एमवाई एस प्रसाद ने बताया कि इसरो 15 से 20 दिसंबर के बीच कभी भी अपने सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी-मार्क 3 (एलवीएम 3 एक्स मिशन) का प्रक्षेपण करेगा। रॉकेट अपने पुन:प्रवेश क्षमता के परीक्षण के लिए एक क्रू मॉड्यूल भी अपने साथ ले जाएगा।
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प्रक्षेपण का मकसद उन्नत रॉकेट की स्थिरता एवं इसकी वायुमंडलीय क्षमताओं की जांच करना है और इसे वायुमंडल में फिर से प्रवेश कराने को लेकर क्रू मॉड्यूल का अध्ययन करना है। प्रसाद ने कहा कि रॉकेट पर जहां 140 करोड़ रुपये का खर्च आएगा, वहीं क्रू मॉड्यूल पर 15 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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उन्नत ‘जीएसएलवी मार्क-3’ के बारे में बताते हुए परियोजना निदेशक एस सोमनाथ ने कहा कि रॉकेट चार टन तक का पेलोड लेकर जा सकता है। यह भारत की ओर से प्रक्षेपित किया जाने वाला अब तक का सबसे भारी रॉकेट होगा। इसका वजन 630 टन है।
क्रायोजेनिक चरण का नहीं बल्कि सिर्फ पहले दो चरणों का परीक्षण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि क्रायोजेनिक इंजन के विकास का काम जारी है और इसमें दो और साल का समय लगेगा। केंद्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर अब तक इंसान को भेजने की मंजूरी नहीं दी है।